Thursday, 12 February 2026

कुवाँ के आंसू

 कुवाँ के आंसू


कुवाँ के घिर्री म,

अब बाल्टी नइ झूले|

पार मा ऑवर-भॉवर,

भँसकटिया नइ फूले |


टेंड़ा पाटी टूट के सरगे हे|

कोला-बारी परिया परगे हे |

तरी ले ऊप्पर तक,

मेकरा के जाला बनगे हे|

गोड़ेला,पुचपुची,सल्हई के,

चारो मुड़ा झाला बनगे हे|


जागे हे बोईर-बंम्भरी,

कुवाँ के पार म |

खोजे म बिरले मिलथे,

कुवाँ खेत-खार म |


मनखे ल नल अउ बोरिंग मिलगे|

कुवाँ ल भीतरे-भीतर पाताल लिलगे|

कनकी कोदई धोवत नइ दिखे दादी नानी|

अब लगर नहाये नही कोनो राजा रानी |


नवा जमाना ह करे हे,

ओखर हिरदे के चानी|

कुवाँ के ऑसू ए,

 थोर बहुत भराय पानी|


                जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

                         बाल्को(कोरबा)

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