Friday, 29 May 2026

एटीएम के गत-कुंडलियाँ छंद

 एटीएम के गत-कुंडलियाँ छंद


पइसा बिन एटीएम हा, खड़े रथे मुँह फार।

हमर होय बैलेंस कम, दंड लेय सरकार।।

दंड लेय सरकार, आम खाता धारी ले।

बोचक जाये बैंक, झाड़ पल्ला पारी ले।।

सुने भला अब कोन, करिन का काये कइसा।

ठँउका रहिथे काम, मिले नइ खोजे पइसा।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)



कुण्डलियां-नेता घर नेता


नेता के बेटी बहू, बाई भाई पूत।

नित नेता बनते रही , भागे नइ ये भूत।।

भागे नइ ये भूत, हरे कुर्सी इँखरे बर।

होवत रहिथे खेल, इहिच मन ला नित दे बर।

गला फाड़ चिल्लाय, उहू ये पद के क्रेता।

आम चुहकहीं आम, रही नेता घर नेता।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को,कोरबा(छग)



फेक अकड़ गुमान- कुंडलियाँ

धन दौलत मद जोर झन, हक ला कखरो मार।

बने काम करते रहा, निभा हरेक किरदार।।

निभा हरेक किरदार, जमाना जुगजुग जाने।

बाँचे रहे जमीर, मनुष कस सब झन माने।।

हरस मनुष के जात, मनुष बर झन गड्ढा खन।

फेक अकड़ गुमान, रहे नइ सबदिन तन धन।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को,कोरबा(छग)



तीन सवारी-कुंडलियाँ


तीन सवारी देख के, काटे पुलिस चलान।

भरे खचाखच रेल हे, निकल जथे जी जान।।

निकल जथे जी जान, व्यवस्था कोन सुधारे।

लेये बर लउहाय, देय बर पल्ला झारे।

आम खास मा भेद, होय सब कोती भारी।

रोड दिखे ना भीड़, दिखे बस तीन सवारी।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को,कोरबा(छग)


कुर्सी-कुंडलियाँ

जनता के पीये लहू, नेता मन बन शेर।

जॉब घटय कुर्सी बढ़य, कइसन आगे बेर।।

कइसन आगे बेर, मचे कुर्सी के झगड़ा।।

कइसे होय विकास, करें घोटाला तगड़ा।।

सब ला जोर सुनाँय, कहानी संता बंता।।

इती उती के बात, सुने हँस हँस के जनता।


खैरझिटिया



अइसन काबर-कुंडलियाँ


डॉक्टर झोला छाप कहि, शासन वसुलै दंड।

नेता झोला छाप हे, मिलजुल खावँय फंड।।

मिलजुल खावँय फंड, उठावै अँगरी कौने।

नियम तोड़थें रोज, नियम नित हाँके तौने।

मनके करथें काम, सबे ला खीसा मा धर।

गरजे अँगठा छाप, डरे भल मास्टर डॉक्टर।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)


रोय रसोई


रोय रसोई गैस बिन, गाड़ी हा बिन तेल।

चीज सबे महँगात हे, होय युद्ध जस खेल।।

होय युद्ध जस खेल, बजत हे दुख के बाजा।

बनके तिगड़म बाज, जुलुम ढावत हें राजा।।

कर नइ सके विकास, तेल टावर बिन कोई। 

रहे सदा सुख चैन, कभू झन रोय रसोई।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)




कोल्ड ड्रिंक्स के राज मा, नींबू सरबत फेल।

कब का हा महँगा जही, आय समझ नइ खेल।

हावी हावय उधोगी।

आम जन भुक्तभोगी।


नेता


नेता मन रैली करे, सड़क चौक ला घेर।

जाम लगे चारो डहर, खड़े पुलिस मुँह फेर।।

खड़े पुलिस मुँह फेर, देख के फुदरे नेता।।

पाके मनखें आम, नियम कहि हुदरे नेता।

शासन ला रख जेब, घुमे बन विश्व विजेता।

जनता जाए भाड़, करे मनमानी नेता।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)


फूफा


रिस्ता मा बिखराव आम होगे।

जुड़ छइयां देख आज घाम होगे।

भीतरे भीतर तिगड़म फूफू करे,

इती फूफा बिचारा बदनाम होंगे।

खैरझिटिया



किरायेदार-कुंडलियाँ


गरू लगे दाई ददा, हरू किरायेदार।

होन देन नइ कुछु कमी, खूब करे सत्कार।।

खूब करे सत्कार, लागमानी हो जइसे।

पइसा खातिर आज, मनुष रँग बदले कइसे।।

सबझन के इहि  हाल, कहे मा करू लगे।

कइसन दिन हे आय, ददा दाई गरू लगे।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)


पद पइसा- कुंडलियाँ

पद पइसा के चाह मा, बाँचे कहाँ ईमान।

झन जा बोली बात मा, बिक जाथे इंसान।।

बिक जाथे इंसान, अपन पहिचान भुलाके।

हो जाथे खामोश, मूड़ मा ताज सजाके।।

माया आघू मान, मनुष के होवव रदखद।

अवसर देख जुगाड़, करें पाए बर सब पद।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बालको,कोरबा(छग)


नत्ता रिस्ता आज बाजारू होगे।

नँदात नरियर गंगा बारू होगे।

गय सुदामा किशन के जमाना,

अब दोस्ती मतलब दारू होगे।।

खैरझिटिया


सोचो यदि मच्छर साठ साल जीते,  

न जाने किसका कितना खून पीते।  

इसीलिए जल्दी मौत मिली है उसे,  

पर आदमी क्यों बन बैठा है चीते।  

खैरझिटिया


छप्पर-छानी कब छत हो गई, पता नहीं चला।  

मेरे खिलाफ़ कब जनमत हो गई, पता नहीं चला।  

कभी यहाँ, कभी वहाँ—रोज़ मंज़िल ढूँढते रहे,  

कब राह से मोहब्बत हो गई, पता नहीं चला।  

खैरझिटिया

तेंदू- दोहा- चोपाई छंद

 तेंदू- दोहा- चोपाई छंद


लउठी तेंदू सार के, चलव खांध मा डार।

काँपे बैरी देख के, बल पावव भरमार।।


तेंदू रुखवा हमर राज के। खास पेड़ ए काल आज के।।

छोटे बड़े सबो झन जाने। तेंदू के गुण गोठ बखाने।।


तेंदू पाना हरियर सोना। बनथे जेखर पत्तल दोना।।

टोरें गर्मी दिन मा सबझन। पायँ बेंच के रुपया खनखन।।


बने बिड़ी तेंदू पाना के। हरे दवा दादा नाना के।।

औषधि गुण तेंदू के अड़बड़। पेड़ बिना जिनगी हे गड़बड़।।


तेंदू के लउठी हे नामी। संग देय जस देवन धामी।।

तेंदू लकड़ी रथे टिकाऊ। बने बेठ नांगर अउ पाऊ।।


लकड़ी चिटचिट करे जले मा। अपन तीर ये खिंचे फले मा।।

अबड़ मिठाथे पाके फर हा। भाभे घलो केंवची जर हा।।


आँख पेट सर्दी खाँसी बर। काम आय एखर पत्ता फर।।

हरे जानवर मन के चारा। पात केंवची लगथे न्यारा।।


तेंदू फर मा होथे रेसा। पात देय कतको ला पेसा।

फले फुले जिनगी के खेती। जल जंगल जमीन के सेती।


जंगल हा तेंदू बिना, जंगल कहाँ कहाय।

भरे जेठ बैसाख मा, तेंदू पेड़ बुलाय।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

कुदरत ले झन खेलव-लावणी छंद

 कुदरत ले झन खेलव-लावणी छंद


मनुष रहू बौना के बौना, पवन पेय के टक्कर मा।

गँवा जथे कतको जिनगी हा, मजा करे के चक्कर मा।।


बीहड़ डोंगर पर्वत घाटी, बन बरफ समुंदर पानी।

ये सब सँग खेले के सेती, उजड़े कतको जिनगानी।।

खेलव झन पानी पुरवा ले, हवा गरेरा झक्कर मा।

मनुष रहू बौना के बौना, पवन पेय के टक्कर मा।


अपन दायरा जतका हावै, ततके नित पाँव लमावव।

कुदरत के कानून कड़ा हे, जादा झने मेछरावव।।

पानी मिल पानी कर देथे, नून होय या शक्कर मा।

मनुष रहू बौना के बौना, पवन पेय के टक्कर मा।


मनखें मन सँग हाँसव खेलव, गढ़व कढ़व कुदरत ला।

सोचें समझे के ताकत हे, छोडव मद जिद अउ लत ला।।

काम करव झन बनके अड़हा, पड़के लउहा लक्कर मा।

मनुष रहू बौना के बौना, पवन पेय के टक्कर मा।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

रार मचे हे खाड़ी मा

 रार मचे हे खाड़ी मा


भात चुरे नइ काड़ी मा।

सोवा परगे हाँड़ी मा।

गैस सिरागे जेब चिरागे,

रार मचे हे खाड़ी मा।।


साग उगे नइ बाड़ी मा।

खेत पटागे झाड़ी मा।।

आफत हा अब अवसर बनगे,

लहू सुखागे नाड़ी मा।

रार मचे हे खाड़ी मा----


हें मजदूर दिहाड़ी मा।

फोकस हवैं खिलाड़ी मा।।

भला भरोसा काय करीं अब।

गुजराती मरवाड़ी मा।।

रार मचे हे खाड़ी मा----


दरद उठत हे माड़ी मा।

तेल सिरागे गाड़ी मा।।

पिसागेन पर के झगरा मा,

बइठे बइठे भाँड़ी मा।।

रार मचे हे खाड़ी मा----


कतकों बिकगे साड़ी मा।

कतकों  दारू ताड़ी मा।

नेता ला बस कुर्सी चाही,

सोज बाय अउ आड़ी मा।

रार मचे हे खाड़ी मा----


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

वर दे माँ शारदे (सरसी छन्द)

 वर दे माँ शारदे (सरसी छन्द)


दे अइसन वरदान शारदा, दे अइसन वरदान।

गुण गियान यश धन बल बाढ़ै,बाढ़ै झन अभिमान।


तोर कृपा नित होवत राहय, होय कलम अउ धार।

बने बात ला पढ़ लिख के मैं, बढ़ा सकौं संस्कार।

मरहम बने कलम हा मोरे, बने कभू झन बान।

दे अइसन वरदान शारदा, दे अइसन वरदान।।।


जेन बुराई ला लिख देवँव, ते हो जावय दूर।

नाम निशान रहे झन दुख के, सुख छाये भरपूर।

आशा अउ विस्वास जगावँव, छेड़ँव गुरतुर तान।

दे अइसन वरदान शारदा, दे अइसन वरदान।।।


मोर लेखनी मया बढ़ावै, पीरा के गल रेत।

झगड़ा झंझट अधम करइया, पढ़के होय सचेत।

कलम चले निर्माण करे बर, लाये नवा बिहान।

दे अइसन वरदान शारदा, दे अइसन वरदान।।।


अपन लेखनी के दम मा मैं, जोड़ सकौं संसार।

इरखा द्वेष दरद दुरिहाके, टार सकौं अँधियार।

जिया लमाके पढ़ै सबो झन, सुनै लगाके कान।

दे अइसन वरदान शारदा, दे अइसन वरदान।।।


जीतेंन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)


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सुभगति छंद-शारद मां


दे ज्ञान माँ।वरदान माँ।

भव तारदे।माँ शारदे।


आनन्द दे।सुर छंद दे।

गुण ज्ञान दे।सम्मान दे।


सुख गीत दे।सत मीत दे।

सुरतान दे।अरमान दे।


दुख क्लेश ला।लत द्वेश ला।

दुरिहा भगा।सतगुण जगा।।


जोती जला।दे गुण कला।

माथा नवा।माँगौ दवा।


चढ़ हंस मा।सुभ अंस मा।

आ द्वार मा।भुज चार मा।


दुरिहा बला।अवगुण जला।

बिगड़ी बना।सतगुण जना।


वीणा सुना।मैं हँव उना।

पैंया परौं।अरजी करौं।


सद रीत दे।अउ जीत दे।

सत वार दे।माँ शारदे।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

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दोहा गीत- माँ शारदे


जयजय जय माँ शारदे,पाँव परत हँव तोर।

तोर शरण मा आय हौं, आरो लेबे मोर।।


तैं जननी सुर साज के, तिही ज्ञान आधार।

तोर कृपा के सध जथे, भव बाधा संसार।।

रखबे मोला बाँध के, अँचरा के माँ कोर।

जयजय जय माँ शारदे,पाँव परत हँव तोर।


नइ चाही माँ धन रतन, नइ चाही रँग रूप।

मन भीतर अज्ञान के, रहय न एको कूप।

वीणा के झंकार मा, गुँजै गली घर खोर।

जयजय जय माँ शारदे,पाँव परत हँव तोर।


झरत रहय माँ बोल मा, सबदिन सुर संगीत।

प्रेम देख मैं हार जँव, अहंकार लौं जीत।

दै सुकून नित सांझ हा, आस जगावै भोर।

जयजय जय माँ शारदे,पाँव परत हँव तोर।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)


जय माँ शारदे, बसन्त पंचमी की सादर बधाइयाँ

जब तक चुनाव रिहिस

 जब तक चुनाव रिहिस


अच्छा दिन के हाव भाव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।

आम जनता के हियाव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।1


आव अउ समस्या बताव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।

अंडा मछरी भेल खाव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।2


तेल पानी गैस में ठहराव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।

नारा मा महँगाई दुरिहाव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।3


ईरान अमरीका संग जुराव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।

हारमुज ले बुलकत नाव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।4


संसो के नइ दिखत सिर पाँव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।

चारों खूंट विश्व गुरु के दबाव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।5


जीतेन्द्र वर्मा'₹"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

झालमुड़ी अभी के का?

 झालमुड़ी अभी के का?


डिही घर गांव गुड़ी, अभी के का।

ये बिंदिया ये चुड़ी, अभी के का।।1


रँग रँग के रोटी पीठा खात आवत हन,

ये भजिया ये पुड़ी, अभी के का।।2


कोनो ला गर्मी लगे, कोनो ला सर्दी,

तन लोर फोड़ा जुड़ी, अभी के का।।3


तँउरे के अलगे मजा हे नदी ताल के,

लहरा फोटका बुड़बुड़ी,अभी के का।।4


खात हें देखा देखा आज सब अचानक,

ये भेल झालमुड़ी, अभी के का।।5


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)