Sunday, 26 April 2026

तभो नेता मन के कद बाढ़े हे

 तभो नेता मन के कद बाढ़े हे


पानी बिजली के हाल बेहाल हे।

डहर बाट मा खुदे नरवा ताल हे।।

नियम धियम गुंडा मन बनात हें,

न ढंग के स्कूल न अस्पताल हे।

विकास घोषणा पत्र मा माढ़े हे।

तभो नेता मन के कद बाढ़े हे।।


कपड़ा ओनहा बस सादा हे।

मन भीतर भराय खादा हे।।

पैसा पहुँच के बस पर लगाथे,

एको ठन पुरोये नइ वादा हे।।

जनता बर शनि साते साढ़े हे।

तभो नेता मन के कद बाढ़े हे।।


फूल माला के दीवाना ये मन।

जाने बस नित खाना ये मन।।

अपन जेब मा धरके रखें सदा,

कोर्ट कछेरी अउ थाना ये मन।

तभो जयकार करइया ठाढ़े हे।

तभे नेता मन के कद बाढ़े हे।।


जीतेंद्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)



कुंडलियाँ छंद-जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"


रावन रावन हे तिंहा, राम कहाँ ले आय।

रावन ला रावन हने, रावन खुशी मनाय।

रावन खुशी मनाय, भुलाके अपने गत ला।

अंहकार के दास, बने हे तज तप सत ला।

धनबल गुण ना ज्ञान, तभो लागे देखावन।

नइहे कहुँती राम, दिखे बस रावन रावन।।


रावन के पुतला कहे, काम रतन नइ आय।

अहंकार ला छोड़ दव, झन लेवव कुछु हाय।

झन लेवव कुछु हाय, बाय हो जाही जिनगी।

छुटही जोरे चीज, धार बोहाही जिनगी।

मद माया अउ मोह, खोज के खुदे जलावन।

नइ ते जलहू रोज, मोर कस बनके रावन।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)


विजय दशमी की आप सबको ढेरों बधाइयाँ





गीत-तैं मोला भुला के जी पाबे का बता।

 गीत-तैं मोला भुला के जी पाबे का बता।



तैं मोला भुला के जी, पाबे का बता।

मैं तो तड़पते हौं, तैं खुद ला झन सता।।


मोर दिल के धड़कन, नाम लेथे तोर वो।

तोर दिल के धड़कन, नाम लेथे मोर वो।

तोर मोर जिनगी के, एक्के हे पता।

तैं मोला भुला के जी, पाबे का बता।।


कइसे पहाबे जिनगी, तोर उमर हे सोला।

कोन बात ला धरे हस, नइहे सुरता मोला।

जिनगी मा होते रइथे, छोट मोट खता।

तैं मोला भुला के जी, पाबे का बता।।


चुरत रबे रिस मा कब तक, भूत ला भूल जा।

छुटे नही जिनगी भर, मया रंग मा घूल जा।।

ये तन पुजारन ए, दिल आये देवता।

तैं मोला भुला के जी, पाबे का बता।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को,कोरबा(छग)


💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐


गीत-झन छोड़ मया ला।


झन छोड़ मया ला।

झन छोड़ मया ला।।

हाय मोर मया ला।

हाय मोर मया ला।।

जान के तैंहा खेल खिलौना,

झन तोड़ मया ला—----------


मया हे ता,  सांस चलत हे।

मया मा मन पंछी पलत हे।।

बिन मया के तन न मन हे,

राखे रहिबे जोड़ मया ला—------


देखेंव सपना मया ला पा के।

सरी दुनिया ले दुरिहा जाके।।

बीच मझधार मा तैंहा सजनी,

झन बोर मया ला—-----------


लड़की

जरत हवों मैं अलथी कलथी।

होगे मोर ले भारी गलती।।

अंतस मा बसाके रखहूँ,

मैं तोर मया ला—----------


जीतेंद्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को कोरबा(छग)







गरमी मा ताल नदी स्नान-सार छंद

 गरमी मा ताल नदी स्नान-सार छंद


देख घाम मा नदिया तरिया, सबके मन ललचाथे।

चटचट जरथे चारो कोती, जुड़ जल जिया लुभाथे।।


पार पाय नइ नल अउ बोरिंग, नदिया अउ तरिया के।

भेदभाव नइ करे ताल नद, गुरिया अउ करिया के।

कल कल करथे धार नदी के, लहर ताल के गाथे।

देख घाम मा नदिया तरिया, सबके मन ललचाथे।।


कोनो कूदे कानों तँउरे, कोनो डुबकी मारे।

तन के कतको रोग रई हा, डुबकत तँउरत हारे।

बुड़े बुड़े पानी के भीतर, कतको बेर पहाथे।

देख घाम मा नदिया तरिया, सबके मन ललचाथे।


लहरा होथे गहरा होथे, डर तक रहिथे भारी।

नइ जाने तँउरें बर तउने, मारे झन हुशियारी॥ 

जीव जंतु तक के ये डेरा, काम सबे के आथे।

देख घाम मा नदिया तरिया, सबके मन ललचाथे।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

गर्मी छुट्टी(रोला छंद)

 """"""""गर्मी छुट्टी(रोला छंद)


बन्द हवे इस्कूल,जुरे सब लइका मन जी।

बाढ़य कतको घाम,तभो घूमै बनबन जी।

मजा उड़ावै घूम,खार बखरी अउ बारी।

खेले  खाये खूब,पटे  सबके  बड़ तारी।


किंजरे धरके खाँध,सबो साथी अउ संगी।

लगे जेठ  बइसाख,मजा  लेवय  सतरंगी।

पासा  कभू  ढुलाय,कभू  राजा अउ रानी।

मिलके खेले खेल,कहे मधुरस कस बानी।


लउठी  पथरा  फेक,गिरावै  अमली मिलके।

अमरे आमा जाम,अँकोसी मा कमचिल के।

धरके डॅगनी हाथ,चढ़े सब बिरवा मा जी।

कोसा लासा हेर ,खाय  रँग रँग के खाजी।


घूमय खारे  खार,नहावय  नँदिया  नरवा।

तँउरे ताल मतंग,जरे जब जब जी तरवा।

आमाअमली तोड़,खाय जी नून मिलाके।

लाटा खूब बनाय,कुचर अमली ला पाके।


खेले खाय मतंग,भोंभरा  मा गरमी के।

तेंदू कोवा चार,लिमउवा फर दरमी के।

खाय कलिंदर लाल,खाय बड़ ककड़ी खीरा।

तोड़  खाय  खरबूज,भगाये   तन   के  पीरा।


पेड़ तरी मा लोर,करे सब हँसी ठिठोली।

धरे  फर  ला  जेब,भरे बोरा अउ झोली।

अमली आमा देख,होय खुश घर मा सबझन।

कहे  करे बड़ घाम,खार  मा  जाहू  अबझन।


दाइ ददा समझाय,तभो कोनो नइ माने।

किंजरे  घामे घामे,खेल  भाये  ना आने।

धरे गोंदली जेब,जेठ ला बिजरावय जी।

बर पीपर के छाँव,गाँव गर्मी भावय जी।


झट बुलके दिन रात,पता कोई ना पावै।

गर्मी छुट्टी आय,सबो  मिल मजा उड़ावै।

बाढ़े मया पिरीत,खाय अउ खेले मा जी।

तन मन होवै पोठ,घाम  ला झेले मा जी।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को(कोरबा)

Saturday, 25 April 2026

खूनी खेल जारी हे,, काबर लालेच म खेलथस???

 खूनी खेल जारी हे,,


काबर लालेच म खेलथस???


अऊ तो रंग बहुत हे,

काबर लालेच म काबर खेलथस?

हॉसत खेलत जिनगी म,

काबर बारूद मेलथस?


पीके पानी फरी,

जुडा़ अपन नरी,

फेर काबर लहू पियत हस?

मनखे अस ता, मन म समा,

रक्सा कस का जियत हस?


हरिंयर रंग हरागे हे,

ललहूं होगे हे माटी।

थोरकन तो दया धरम देखा,

का पथरा के हे तोर छाती?

भरके बंदूक म  गोली,

निरदई कस ठेलथस......

अऊ तो रंग ............

.............खेलथस  ???


बंदूक गईंज चलायेस,

अब भाईचारा भँजा के देख !

मारे हस जेखर गोंसईंया,बेटा ल,

ओखरो घर जाके देख,!.

मनखे होके मनखे ल ,                                                                                                                                                                     खावत हस नोंच नोंच !

फिलगे हे अचरा आंसू म,

अब ताे दाई के आंसू पोंछ !

छेदा छेदा के बम बारूद म,

दाई के छाती चानी हाेगे हे !

तरिया ढोंड़गा नरवा के पानी,

ललहुं  बानी होगे हे  !

कोन देखाथे ऑखी तोला,

बता!! का बात ल पेलथस?

अऊ तो रंग................

.....................खेलथस ??


अलहन ऊपर अलहन होत हे।

जंगल तीर के गांव रोज रोत हे।

कल्हरत हे कुंदरा,

 आँसू ढारत हे महतारी।

कब जिवरा ले डर भागही,

 कब टरही गोला बारी।।

खून खराबा बने नोहे,

आखिर दरद तो तहूँ झेलथस।

अऊ तो रंग.....................

..........................खेलथस?


जंगल के जीव जीवलेवा हे,

फेर तोर जइसे नही,!

कहां लुकाबे बनवासी बन,

जब श्री राम आ जही!

छीत मया के रंग,

अऊ खेल रंग गुलाल ले,!

नाच पारा -पारा बाजे नंगाडा़!

निकल जंगल के जाल ले!

खेल खेल म का खेले तैं,

मनखे के जीव लेलेय तैं,

अति के अंत हब ले होही,

बात मोर मान ले!

लड़ना हे त देश बर लड़,

छाती फूलाके शान ले!

फूल-फूलवारी मितान बना,

आखिर काखर बात ल एल्हथस??

अऊ तो रंग.....................

.............................खेलथस????


जीतेन्र्द वर्मा

खैरझिटी(राजनांदगांव)

संगे संग मया

 संगे संग मया


अब कइसे रचही, मधूबन म रास रे ? 

मोर तीर हे बंसरी, अऊ तोर तीर हे साँस रे ।


कलेचुप खड़े हे, कदम के रूखवा ।

 तंय पूर्वाइयाँ, अऊ मंय हर पात ||


कइसे ममहाही,  मोंगरा मया के ?

 मंय हर पतझड़, अऊ तंय मधूमास रे ।।


चलत हे बरोड़ा, उड़ावत हे धूर्रा ।

 तंय हर बिरौनी, मंय हर आँख रे ।।


मइलहा मन, मनभात नइहे मनखे के ।

 मया के तरिया म, मन ल काँच रे ।।


फेंक के देख मया के गरी, छत्तीसगढ़ भर । 

अइसने अरझ जही, फेर छल ले झन फाँस रे ।।


न रो, न रोवा, खा तेंदू -चार - कोवा ।

टपका मुंहुँ ले मंदरस, अऊ मन भर हाँस रे ।।


थोरकिन ते खा, थोरकिन भूखाय ल खवा ।

 कर सिंगार महतारी के, नंवाके माथ रे ।।


ओनहा- कोनहाल, करदे अंजोर । 

मया के माटी ले, उँच-नीच ल पाट रे ।।


का हे भरोसा, जिनगी के सिरतोन म ? 

मया - पिरीत ल, झंऊहा- झंऊहा बाँट रे ।।


जीतेन्द्र वर्मा खैरझिटिया

बाल्को कोरबा (छग)

Monday, 20 April 2026

डीजे

 डीजे


जब ले डीजे आय हे, सब भिकिर भाकर होगे।

लगे देख अलकरहा, मनखें कुकुर माकर होगे।।


कानफोड़वा साउंड, हिरदे दरकत बेस।

कला दिखे बला मा, आगी लगे हे टेस।।

हो हल्ला हरहा होगे, सुर संगीत बर साँकर होगे।

जब ले डीजे आय हे, सब भिकिर भाकर होगे।।


ना कोनो  हा सुनत हें, ना कोनो गुनत हें।

लोक लाज के पट ला, सबझन चुनत हें।।

पके बस ख्याली खिचड़ी, मया मीत डाँकर होगे।

जब ले डीजे आय हे, सब भिकिर भाकर होगे।।


छट्ठी बरही बर बिहाव, रमाएन गीता भगवद।

सबो मा हबरगे डीजे, होगे खदबद गदबद।।

कला कल्हरे कोंटा मा, बला घर नौकर चाकर होगे।

जब ले डीजे आय हे, सब भिकिर भाकर होगे।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)