....मोर गॉव अब शहर बनगे.....
शहरिया शोर म दबगे,सिसन्हिन के ताना|
लहलहावत खेतखार म बनगे,बड़े-बड़े कारखाना|
नदिया नहर जबर होगे ,डाहर बनगे बड़ चंवड़ा|
पड़की परेवा फुरफुंदी नंदात हे,नंदात हे तितली भंवरा|
सड़क तीर के बर पीपर कटगे, कटगे अमली आमा|
सियान के किस्सा नई भॉय,सब देखे टीभी डरामा|
पाहट के आहट,अउ संझा के शॉति आज कहर बनगे...|
मैय हॉसव कि रोववौ,मोर गॉव आज शहर बनगे.........|
संगमरमर के मंदिर ह,देवत हवे नेवता|
कहॉ पाबे गली म,अब बंदन चुपरे देवता?
तरिया ढोड़गा सुन्ना होगे,घर म होगे पखाना सावर|
बोंदवा होगे बिन रूख राई के,डंगडंग ले गड़गे टावर|
मया के बोली करकस होगे,लईका होगे हुशियार|
अत्तिक पढ़ लिख डारे हे,दाई ददा ल देथे बिसार|
बिहनिया के ताजा हवा घलो,अब जहर बनगे....|
मै हॉसव कि रोववौ,मोर गॉव आज शहर बनगे...|
मंदिर-मस्जिद गुरूद्वारा संग, सबला बॉट डरिस|
जंगल अउ रीता भुंइया ल,चुकता चॉट डरिस|
छत के घर म, कसके तमासा|
नई करेय कोई कखरो ले आसा|
होरी देवारी तीजा पोरा,घर के डेहरी म सिमटागे|
चाहे कोनो परब तिहार होय,सब एक बरोबर लागे|
नक्सा खसरा संग आदमी बदलगे होगे ताना बाना|
चाकू छुरी बंदूक निकलगे सजगे मयखाना |
चपेटागे बखरी बियारा,पैडगरी अब फोरलेन डहर बनके....|
मै हॉसव कि रोववौ मोर गॉव आज शहर बनगे......|
जीतेन्द्र कुमार वर्मा
खैरझिटी (राजनॉदगॉव)