Tuesday, 4 August 2026

महाशिवरात्रि के आप सबो ला सादर बधाई

 आखरी सावन सोमवारी के अवसर म....


सागर मंथन कस मन मथदे(कुकुभ छंद)


सागर मंथन कस मन मथके,मद महुरा पी जा बाबा।

दुःख द्वेस जर जलन जराके,सत के बो बीजा बाबा।


मन मा भरे जहर ले जादा,नइहे कुछु अउ जहरीला।

येला पीये बर शिव भोला, देखादे  तैं कुछु लीला।

सात समुंदर घलो मथे मा, विष अतका नइ तो होही।

जतका मनखे मन मा हावय,जान तोर अन्तस रोही।

बड़े  छोट  ला घूरत  हावय, साली  ला जीजा बाबा।

सागर मंथन कस मन मथके,मद महुरा पी जा बाबा।


बोली भाँखा करू करू हे,मार काट होगे ठट्ठा।

अहंकार के आघू बइठे,धरम करम सत के भट्ठा।

धन बल मा अटियावत घूमय,पीटे मनमर्जी बाजा।

जीव जिनावर मन ला मारे,बनके मनखे यमराजा।

दीन  दुखी  मन  घाव  धरे  हे,आके  तैं सी जा बाबा।

सागर मंथन कस मन मथके,मद महुरा पी जा बाबा।


धरम करम हा बाढ़े निसदिन,कम होवै अत्याचारी।

डरे  राक्षसी  मनखे  मन हा,कर  तांडव हे त्रिपुरारी।

भगतन मनके भाग बनादे,फेंक असुर मन बर भाला।

दया मया के बरसा करदे,झार भरम भुतवा जाला।

रहि  उपास  मैं  सुमरँव तोला ,सम्मारी  तीजा  बाबा।

सागर मंथन कस मन मथके,मद महुरा पी जा बाबा।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को(कोरबा)


महाशिवरात्रि के आप सबो ला सादर बधाई


जय भोले,,भगवान भोला सबके आस पुराये

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शिव महिमा(शिव छंद)-जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"


डमडमी डमक डमक। शूल बड़ चमक चमक।

शिव शिवाय गात हे। आस जग जगात हे।


चाँद चाकरी करे। सुरसरी जटा झरे।

अटपटा फँसे जटा। शुभ दिखे तभो छटा।


बड़ बरे बुगुर बुगुर। सिर बिराज सोम सुर।

भूत प्रेत कस दिखे। शिव जगत उमर लिखे।


कोप क्लेश हेरथे। भक्त भाग फेरथे।

स्वर्ग आय शिव चरण। नाम जाप कर वरण।


हिमशिखर निवास हे। भीम वास खास हे।

पाँव सुर असुर परे। भाव देख दुख हरे।


भूत भस्म हे बदन। मरघटी शिवा सदन।

बाघ छाल साँप फन। घुरघुराय देख तन।


नग्न नील कंठ तन। भेस भूत भय भुवन।

लोभ मोह भागथे। भक्त भाग जागथे।


शिव हरे क्लेश जर। शिव हरे अजर अमर।

बेल पान जल चढ़ा। भूत नाथ मन मढ़ा।


दूध दूब पान धर। शिव शिवा जुबान भर।

सोमवार नित सुमर। बाढ़ही खुशी उमर।


खंड खंड चर अचर। शिव बने सबेच बर।

तोर मोर ला भुला। दै अशीष मुँह उला।


नाग सुर असुर के। तीर तार दूर के।

कीट खग पतंग के। पस्त अउ मतंग के।


काल के कराल के। भूत  बैयताल के।

नभ धरा पताल के। हल सबे सवाल के।


शिव जगत पिता हरे। लेय नाम ते तरे।

शिव समय गति हरे। सोच शुभ मति हरे।


शिव उजड़ बसंत ए। आदि इति अनंत ए।

शिव लघु विशाल ए। रवि तिमिर मशाल ए।


शिव धरा अनल हवा। शिव गरल सरल दवा।

मृत सजीव शिव सबे। शिव उड़ाय शिव दबे।


शिव समाय सब डहर। शिव उमंग सुख लहर।

शिव सती गणेश के। विष्णु विधि खगेश के।


नाम जप महेश के। लोभ मोह लेश के।

शान्ति सुख सदा रही। नाव भव बुलक जही।


शिव चरित अपार हे। ओमकार सार हे।

का कहै कथा कलम। जीभ मा घलो न दम।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)


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शिव ल सुमर- शिव छंद


रोग डर भगा जही। काल ठग ठगा जही।

पार भव लगा जही। भाग जगमगा जही।


काम झट निपट जही। दुक्ख द्वेष कट जही।

मान शान बाढ़ही। गुण गियान बाढ़ही।।


क्रोध काल जर जही। बैर भाव मर जही।

खेत खार घर रही। सुख सुकुन डहर रही।


आस अउ उमंग बर। जिंदगी म रंग बर।

भक्ति कर महेश के। लोभ मोह लेश के।


सत मया दया जगा। चार चांद नित लगा।

जिंदगी सँवारही। भव भुवन ले तारही।।


देव मा बड़े हवै। भक्त बर खड़े हवै।

रोज शाम अउ सुबे। भक्ति भाव मा डुबे।


नीलकंठ ला सुमर। बाढ़ही सुमत उमर।

तन रही बने बने। रेंगबे तने तने।।


सोमवार नित सुमर। नाच के झुमर झुमर।

हूम धूप दे जला। देव काटही बला।।


दूध बेल पान ले। पूज शिव विधान ले।

तंत्र मंत्र बोल के। भक्ति भाव घोल के।


फूल ले मुठा मुठा। सोय भाग ला उठा।

भक्ति तीर मा रही।शक्ति तीर मा रही।।


फूल फल दुबी चढ़ा। नारियल चँउर मढ़ा।

आरती उतार ले।धूप दीप बार ले।।


शिव पुकार रोज के। भक्ति भाव खोज के।

ओम ओम जाप कर।भूल के न पाप कर।।


भूत भस्म भाल मा। दे चुपर कपाल मा।

ओमकार जागही। भाग तोर भागही।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को (कोरबा)


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सर्वगामी सवैया - खैरझिटिया

माथा म चंदा जटा जूट गंगा गला मा अरोये हवे साँप माला।

नीला  रचे  कंठ  नैना भये तीन नंदी सवारी धरे हाथ भाला।

काया लगे काल छाया सहीं बाघ छाला सजे रूप लागे निराला।

लोटा म पानी रुतो के रिझाले चढ़ा पान पाती ग जाके सिवाला।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को,कोरबा

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घनाक्षरी(भोला बिहाव)-खैरझिटिया


अँधियारी रात मा जी,दीया धर हाथ मा जी,

भूत  प्रेत  साथ  मा  जी ,निकले  बरात  हे।

बइला  सवारी  करे,डमरू  त्रिशूल धरे,

जटा जूट चंदा गंगा,सबला  लुभात हे।

बघवा के छाला हवे,साँप गल माला हवे,

भभूत  लगाये  हवे , डमरू  बजात  हे।

ब्रम्हा बिष्णु आघु चले,देव धामी साधु चले,

भूत  प्रेत  पाछु  खड़े,अबड़ चिल्लात  हे।


भूत प्रेत झूपत हे,कुकूर ह भूँकत हे,

भोला के बराती मा जी,सरी जग साथ हे।

मूड़े मूड़ कतको के,कतको के गोड़े गोड़,

कतको के आँखी जादा,कोनो बिन हाथ हे।

कोनो हा घोंडैया मारे,कोनो उड़े मनमाड़े,

जोगनी परेतिन के ,भोले बाबा नाथ हे।

देव सब सजे भारी,होवै घेरी बेरी चारी,

अस्त्र शस्त्र धर चले,मुकुट जी माथ हे।


काड़ी कस कोनो दिखे,डाँड़ी कस कोनो दिखे,

पेट कखरो हे भारी,एको ना सुहात हे।

कोनो जरे कोनो बरे,हाँसी ठट्ठा खूब करे,

नाचत कूदत सबो,भोले सँग जात हे।

घुघवा हा गावत हे, खुसरा उड़ावत हे,

रक्शा बरत हावय,दिन हे कि रात हे।

हे मरी मसान सब,भोला के मितान सब,

देव मन खड़े देख,अबड़ मुस्कात हे।


गाँव मा गोहार परे,बजनिया सुर धरे,

लइका सियान सबो,देखे बर आय जी।

बिना हाथ वाले बड़,पीटे गा दमऊ धर,

बिना गला वाले देख,गीत ला सुनाय जी।

देवता लुभाये मन,झूमे देख सबो झन,

भूत प्रेत सँग देख,जिया घबराय जी।

आहा का बराती जुरे,देख के जिया हा घुरे,

रानी राजा तीर जाके,देख दुख मनाय जी।


फूल कस नोनी बर,काँटा जोड़ी पोनी बर,

रानी कहे राजा ला जी,तोड़ दौ बिहाव ला।

करेजा के चानी बेटी,मोर देख रानी बेटी,

कइसे जिही जिनगी,धर तन घाव ला।

पारबती आये तीर,माता ल धराये धीर,

सबो जग के स्वामी वो,तज मन भाव ला।

बइला सवारी करे,भोला त्रिपुरारी हरे,

माँगे हौ विधाता ले मैं,पूज इही नाव ला।


बेटी गोठ सुने रानी,मने मन गुने रानी,

तीनो लोक के स्वामी हा,मोर घर आय हे।

भाग सँहिरावै बड़,गुन गान गावै बड़,

हाँस मुस्काय सुघ्घर,बिहाव रचाय हे।

राजा घर माँदीं खाये,बराती सबो अघाये,

अचहर पचहर ,गाँव भर लाय हे।

भाँवर टिकावन मा,बार तिथि पावन मा,

पारबती हा भोला के,मया मा बँधाय हे।


जीतेंद्र वर्मा"खैरझिटिया"

बालको, कोरबा

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जय जयपाली के भोला


जय जय पाली के भोला, 

धोवा धोवा चाँउर चढावौं तोला।।


पानी रुतोवौं भोला, नौकोनिया तरिया के।

बेलपान चढावौं भोला, तोर आघु मड़िया के।।

व्रत राखौं सोला, वर दे दे मोला-------

जय जय पाली के भोला-------------।


तोला सुहाथे प्रभु, नदी बन झाड़ी।

तिहीं चलाथस प्रभु, दुनिया के गाड़ी।।

तर जाये चोला, भर जाये झोला----

जय जय पाली के भोला-----------।


पवन पानी मतागे, जंगल कटाके।

माटी के उप्पर, छत सीमेंट छागे।।

भुँइयाँ परगे पोला, बसरत हे ओला----

जय जय पाली के भोला--------------।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

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 गीत


दानी ए दानी ए, बड़ दानी ए जी।

भोले बाबा अवघड़ दानी ए जी।।

*जे माँगे जइसन,वो पाये वइसन*

*बम बम बोलइया भाग मानी ए जी--*


देवता होवय या फेर कोनो दानव।

जोगी योगी पशु पंछी मानव।।

*सबके पुराये आशा अउ तृष्णा*

*भगतन के छत छानी ए जी---*


नही नइ निकले भोला के मुख ले।

वर पाके भगतन रहे सदा सुख ले।।

*पीयव अउ जीयव सुखमय जिनगी*

*शिव नाम अमरित पानी ए जी---*


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)


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 गीत


चलो चलो गा भैया, भोले बाबा के बरात जाबों।

राजा हिमांचल के घर जाके, खीर पुड़ी लाड़ू खाबों।।


नन्दी बइला मा भोला चढ़े हे।

हाथ मा त्रिशूल डमरू धरे हे।।

राख ला चुपरे हे तन मा, औघड़िया के दरस पाबों।

चलो चलो गा भैया, भोले बाबा के बरात जाबों---


गला मा झूलत हे साँप के माला।

कपड़ा बरोबर हे मृग छाला।।

दफड़ा दमउ निशान बजाबों, बमबम बम बमबम गाबों।

चलो चलो गा भैया, भोले बाबा के बरात जाबों------


ब्रह्मा हा जावत हे,विष्णु हा जावत हे।

बरात जाय बर भूत प्रेत आवत हे।।

शिव भोला के आशीष पाबों, धतूरा चाँउर पान फूल चढ़ाबों।

चलो चलो गा भैया, भोले बाबा के बरात जाबों------------।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को,कोरबा(छग)

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शिव डमरू वाले बर,डमरू घनाक्षरी


सुमर सुमर मँय, झुमर झुमर मँय।

परत हवँव पग, डर दुख हर हर।।

समझ परख मति, जय जय जगपति।

झट दव सदगति, सुख सत भर हर।।

अहम बढ़य बड़, असत चढ़य बड़।

असुरन मन बर, तिरशुल धर हर।।

रवि सम चमचम, चमकँव हरदम।

कटय छँटय तम, अइसन कर हर।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

खैरझिटिया


शिव छंद- सुमधुर लोक गायक भैया डिमान सेन के आवाज म

जय शंकर, जय भोले

Saturday, 1 August 2026

सुरता के सावन-कुकुभ छंद

 सुरता के सावन-कुकुभ छंद


बही तोर सुरता के सावन, रहरहि आके भींगाथे।

पार जिया के बाँधौं कतको, मया छलक तभ्भो जाथे।।


करिया चुन्दी उड़ै हवा मा, लागे बदरा हे छाये।

आँखी चमके बिजुरी जइसे, मुस्की हा गाज गिराये।।

बूँद मया के बरसै रझरझ, मन मँजूर बन इतराथे।

बही तोर सुरता के सावन, रहरहि आके भींगाथे।


रोम रोम हा मोर रूख कस, लहर लहर बड़ लहराये।

मया जाल मा अरझे सपना, मछरी जइसे अँटियाये।।

नाम रटे मन दादुर बनके , फुरफुन्दी कस उड़ियाथे।।

बही तोर सुरता के सावन, रहरहि आके भींगाथे।।


आस जिया के ताल नदी कस, पी पी के नीर अघाये।

मया दया के घउदे खेती, सावन जिवरा हरसाये।।

झड़ी सही बरसे कतको दिन, सब सुधबुध जिया गँवाथे।

बही तोर सुरता के सावन, रहरहि आके भींगाथे।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को,कोरबा(छग)

कुंडलियाँ छंद-डिजिटल दौर मा

 कुंडलियाँ छंद-डिजिटल दौर मा


डिजिटल इंडिया हा गजब, मारत हावै जोर।

तुरते होवय काम सब, हाँसे रोवँय चोर।।

हाँसे रोवँय चोर, खबर फइले आगी कस।

पाय बने मन मान, डरे मनखें दागी कस।।

बड़े होय या छोट, मिलत हावँय सबला बल।

सबके मन के बात, बतावय बेरा डिजिटल।।


हावी डिजिटल दौर हे, चारो कोती देख।

कई ऊँचाई ले गिरे, फिरे कई के लेख।।

फिरे कई के लेख, कई पछ्तावत तक हें।

घर लागे ना रोड, सबे कोती बकबक हें।।

करनी करही काय, कोन जन बेरा भावी।

सोच समझ बतियाव, हवै डिजिटल युग हावी।।


राखत हवै रिकार्ड ला, डिजिटल अपन मेर।

गुररावत हे साथ पा,  बकरी तक बन शेर।।

बकरी तक बन शेर, आज नाचत हे बन ठन।

चारी चुगली झूठ, आय आघू मन दनदन।।

सबके खोले पोल, देख कतको हें काँखत।

डिजिटल बेर रिकार्ड, सबे के हावय राखत।।


दिखगिस डिजिटल मा चरित, कइसन हावय कोन।

लोहा आये कोन हा, आय कोन हा सोन।।

आय कोन हा सोन, जान जावत हें दुनिया।

झूठ मूठ हे शोर, असल मा काँपे मुनिया।।

धर देखावा झूठ, इही मा सबझन टिकगिस।

राजा प्रजा समेत, सबें के नीयत दिखगिस।।


सबझन इस्टाग्राम मा, करत हवँय बकलोल।

दुनिया ला बतलात हे, अपन जिया के बोल।।

अपन जिया के बोल, सबें झन हावैं बोलत।

कई नाच देखाय, कई झन हें विष घोलत।।

होही कलो हिसाब, बने आजे भर झन बन।

काखर का हे काम, गड़ाये आँखी सबझन।।


डिजिटल के बाजा बजिस, होगिस बत्ती गोल।

छोट लगत हे अउ ना बड़े, सबें कहें दिल खोल।।

सबें कहें दिल खोल, जिया मा जउने हावँय।

मन मुताबित गीत, सबें झन कइसे गावँय।।

पके झूठ सुन कान, करे जिवरा बड़ तलमल।

बनगे हे हथियार, आज ये बेरा डिजिटल।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

Friday, 31 July 2026

आज के व्यवस्था ऊपर--कुंडलियाँ छंद

 आज के व्यवस्था ऊपर--कुंडलियाँ छंद


नेता मनके घर मिले, बोरा बोरा नोट।

कखरो डर उन ला नहीं, थरथर काँपय छोट।

थरथर काँपय छोट, चुकावैं पाई पाई।

बड़े खाय मिल बाँट, बने सब भाई भाई।

पइसा जेखर तीर, उही ए विश्व विजेता।

कुर्सी ला पोटार, खाय भारत ला नेता।


भारत भुइयाँ मा हमर, गजब मचे हे लूट।

मनखे आम पिसात हे, बड़का ला हे छूट।

बड़का ला हे छूट, करै रोजे मनमानी।

सुरसा कस मुह फार, खाय नित धन दोगानी।

धरम करम सत मान, बड़े मन हावैं बारत।

साथ देय सरकार, बढ़े आघू का भारत।


लंबा कर कानून के, धरे छोट के घेंच।

बात बड़े के होय ता, फँस जाये बड़ पेंच।

फँस जाये बड़ पेंच, करे का कोट कछेरी।

पद पइसा के तीर, लगावैं सबझन फेरी।

मूंदे आँखी कान, कलेचुप बनके खंबा।

देखे बस कानून, जीभ ला करके लंबा।


खीसा मा धनवान के, अफसर नेता नोट।

डरै आम जन देख के, वर्दी करिया कोट।।

वर्दी करिया कोट, सके छोटे मनखे ले।

गले कभू नइ दाल, बड़े मन उल्टा पेले।

नवें रथे दिनरात, छोट बन खम्भा पीसा।

अकड़ अमीर दिखाय, भरे हे कोठी खीसा।


फ्री के झोरे रेवड़ी, नेता अउ जन खास।।

आम आदमी  हे तभे, होवत हवे विकास।

होवत हवे विकास, फकत कुर्सी वाले के।

मर मोटा नइ पाय, आम जन ला सब छेंके।

कई किसम के टैक्स, देय पानी पी पी के।

मनखे आम कमाय, खाय नेता मन फ्री के।


करजा के दम मा बड़े, बड़े बने हे आज।

लोक लाज के डर नही, नइ हे सगा समाज।

नइ हे सगा समाज, कोन देखाये अँगरी।

रंभा रति नचवाय, मंद पी तीरे टँगड़ी।

इँखरे हे सरकार, भले मर जावैं परजा।

सकल सुरत पद देख, बैंक तक देवै करजा।


फर्जी फाइल ला धरे, होगे बड़े फरार।

रोक छोट के साइकिल, गरजै पहरेदार।

गरजै पहरेदार, दिखाके लउठी डंडा।

नाक तरी धनवान, लुटैं सब ला बन पंडा।

पद पा पूँजी जोर, करैं कारज मनमर्जी।

भागे तज के देश, बनाके फाइल फर्जी।


छोट मँझोलन के रहत, बचे हवै ईमान।

गिरथें उठथें रोज के, बड़े बड़े धनवान।

बड़े बड़े धनवान, चलैं पइसा के दम मा।

धर इज्जत ईमान, जिये छोटे मन कम मा।

जादा के ले चाह, नियत नइ देवैं डोलन।

चादर भीतर पाँव, रखैं नित छोट मँझोलन।


माया पइसा मा मिले, पइसा मा रस रास।

इज्जत देखे जाय नइ, पइसा हे यदि पास।

पइसा हे यदि पास, पास वो सब पेपर मा।

रखे जेन मा हाथ, पहुँच जाये वो घर मा।

पइसा मा धूल जाय, चरित अउ बिरबिट काया।

कोन पार पा पाय, जबर पइसा के माया।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

मर लगगे फोटू विडियो-कुकुभ छंद

 मर लगगे फोटू विडियो-कुकुभ छंद


कई काम ला चुपेचाप रहि, मनखे ला करना चाही।

सबे चीज के फोटू विडियो, सदा मान थोरे पाही।।


सेवा सत सुख गुण गियान ला, देखाये बर नइ लागे।

तोपे ढाँके के उघरत हे, उघरे के हा तोपागे।।

हवै मनुष के आय जातरी, धारेच धार बोहाही।

कई काम ला चुपेचाप रहि, मनखे ला करना चाही।।


बर बिहाव छट्ठी बरही के, समझ आय विडियो फोटू।

मरनी हरनी जलत लाश ला, नइ छोड़त हावय मोटू।।

रील बनाये के चक्कर मा, नवा जमाना बोहाही।

कई काम ला चुपेचाप रहि, मनखे ला करना चाही।।


फोटू विडियो मा हे नत्ता, असल बइठगे हे भट्ठा।

मरगे हावय मान मनुष के, भक्ति भाव होगे ठट्ठा।।

आँखी मूँदे बर लागत हे, अउ का काली देखाही।

कई काम ला चुपेचाप रहि, मनखे ला करना चाही।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को,कोरबा(छग)

Wednesday, 29 July 2026

पइसा अउ संगी- सार छन्द

 पइसा अउ संगी- सार छन्द


पइसा के राहत ले मिलथें, किसम किसम के संगी।

रोज चढ़ाथें चना झाड़ मा, ख्वाब दिखा सतरंगी।।


काम करयँ नइ कभू अकेल्ला, रटथें यारी यारी।

जुगत बनाथें खाय पिये के, घूम घूम के भारी।।

चाँटुकार के घोर चासनी, बात कहयँ बेढंगी।

पइसा के राहत ले मिलथें, किसम किसम के संगी।


जिया जीतथें जुरमिल फोकट, झूठमूठ कर दावा।

राहन नइ दय पहली जइसे, रंग रूप पहिनावा।।

बना डारथें सिधवा ला तक, अपने कस हुड़दंगी।

पइसा के राहत ले मिलथें, किसम किसम के संगी।


देवयँ नइ सुझाव फोकट मा, साहब बइगा गुनिया।

किसन सुदामा के जुग नोहे, मतलब के हे दुनिया।

रसा रहत ले चुहके मनभर, तजयँ देख के तंगी।

पइसा के राहत ले मिलथें, किसम किसम के संगी।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को,कोरबा(छग)


अइसनो संगी मन ला मित्रा दिवस के बधाई

Sunday, 26 July 2026

जब तक चुनाव रिहिस

 खातू-कुंडलियाँ छंद


खातू मनके राज मा, खातू बर लुलवान।

खातू ले खेती हवै, का अब करन किसान।।

का अब करन किसान, अधर मा हवै किसानी।

कोन सुने गोहार, कोन दै खातू पानी।।

हें जे जिम्मेदार, सबे खाए के पातू।

संसो खाए खूब, कतिक कब मिलही खातू।।


जीतेन्द्र वर्मा'₹"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)



जब तक चुनाव रिहिस


अच्छा दिन के हाव भाव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।

आम जनता के हियाव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।1


आव अउ समस्या बताव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।

अंडा मछरी भेल खाव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।2


तेल पानी गैस में ठहराव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।

नारा मा महँगाई दुरिहाव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।3


ईरान अमरीका संग जुराव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।

हारमुज ले बुलकत नाव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।4


संसो के नइ दिखत सिर पाँव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।

चारों खूंट विश्व गुरु के दबाव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।5


जीतेन्द्र वर्मा'"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)



गिरगिट जैसा रंग बदलो, राज करोगे।

समय देखके संग बदलो, राज करोगे।।

अपनो से लड़ रहे है, दुश्मन को छोड़कर,

तौर तरीका जंग बदलो, राज करोगे।।


अंग बदलो, राज करोगे।

जंग बदलो , राज करोगे।

बंग बदलो,, राज करोगे।

भंग बदलो,, राज करोगे।