...........दाई दिखथे........
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दाई दिखथे,
ढेंकी के ठक-ठक में।
चुरोना के फट-फट में।
छेना के थप-थप में।
करछुल के खट-खट में।
दाई दिखथे,
अईरसा के पाग में।
भुंजे-बघारे साग में।
लोरी के राग में।
अंचरा के ताग-ताग में।
दाई दिखथे,
गघरी-गुंडी के पानी में।
गुंगवात खपरा छानी में।
बरनी के आमा चानी में।
लईका के तोतवा बानी में।
दाई दिखथे,
चांड़ी-टिपली डुवा में।
घाट-घठौदा कुंवा में।
गौरा भड़ोनी सुवा में।
लईका-लोग के दुवा में।
दाई दिखथे,
तुलसी चंवरा के दिया में।
दुख-पीरा भरे जिया में।
सुखाय छानी के बरी में।
गंजाय कथरी के घरी में।
दाई दिखथे,
लीपे-पोते घर-दुवार में।
बासी माड़े मेड़-पार में।
साग-भाजी नार-बियार में।
बेटा-बेटी के संस्कार में।
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को(कोरबा)