गीत- बने करे भगवान(सरसी छंद)
काम घूस खाये के दै नइ, बने करे भगवान।
महिनत करथौं पइसा पाथौं, नइ डोले ईमान।
पचे नहीं फोकट के पइसा, जस आये तस जाय।
होथे बिरथा बड़का बनना, कखरो ले के हाय।।
बने करम नित करत रहौं मैं, भरत रहै धन धान।
काम घूस खाये के दै नइ, बने करे भगवान।।
खून पछीना के धन दौलत, देवय चैन सुकून।
जादा के हे लालच बिरथा, लोभ मोह ए घून।
बने करम के होथे पूजा, करम धरम अउ दान।
काम घूस खाये के दै नइ, बने करे भगवान।।
घूसखोर के गत देखे हँव, माया पइस न राम।
लरहा बनके घुमते रहिगे, होगिस काम तमाम।।
इँहें सरग हे इँहें नरक हे, लिखथे करम विधान।
काम घूस खाये के दै नइ, बने करे भगवान।।
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को,कोरबा(छग)
गीत-करजा(लावणी छन्द)
बड़े बड़े उद्योगी मन के, रथें करोड़ों मा करजा।
लूट लूट बाजार बैंक ला, पाय रथें बड़का दरजा।
राज देश दुनिया मा करथें, करत रथें नित मनमानी।
उँखर ठिहा मा नेता गुंडा, अउ अफसर भरथें पानी।
सुरा सुंदरी शौक पुरावय,जय जयकार करयँ परजा।
बड़े बड़े उद्योगी मन के, रथें करोड़ों मा करजा।।
दुनिया के कोना कोना मा, करजा के महल अटारी।
कहे कंगला अपन आप ला, आय चुकाये के बारी।
देश छोड़ के होवैं चंपत, कहि जो करना हे कर जा।
बड़े बड़े उद्योगी मन के, रथें करोड़ों मा करजा।।
भेद करे बाजार बैंक हा, सूट बूट अउ पटको के।
एक ठिहा मा पहुँचे पइसा, घींसय पनही कतको के।
लगे एक घर कोट कछेरी, धरे एक ला घर घर जा।
बड़े बड़े उद्योगी मन के, रथें करोड़ों मा करजा।।
मान शान ला भारत भू के, कोनो कोढ़ी झन चाँटे।
एक होय सब नियम धियम हा, बैंक रेवड़ी झन बाँटे।
फोकट मा बाँटे बर हे ता, सबके खीसा ला भर जा।
बड़े बड़े उद्योगी मन के, रथें करोड़ों मा करजा।।
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को,कोरबा(छग)
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