Friday, 6 March 2026

अऊ आगे बईरी बादर तन म मॉस नई बॉचे हे,


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  अऊ आगे बईरी बादर


तन म मॉस नई बॉचे हे,

अब हाड़ा ल घलो खा डर |

मोर सपना ल सरोय बर,

अऊ आगे बईरी बादर|

करेजा ल चानी करेबर,

फर म चना के पानी भरे बर|

रौंदें  बर  लाख-लाखड़ी  ल|

बॉचे-खोंचे आस आखरि ल|

मसरंगी अरसी के फूल कस,

हिरदे म जागे रिहिस सपना|

राहेर सरसो कस खड़े रेंहेव,

बईरी  हवा  हलईस  कतना|

लिड़िंग-लिड़िंग हालत रेंहेव,

अऊ आगे बिपत आगर....|

सरोय  बर मोर  सपना  ल,

अऊ आगे बईरी बादर......|


मोर मंसूर ल मसके बर|

मारे टोंटा ल कसके धर|

मंय   गंहू   कस,  गोहार   पारत  हंव|

जांगर ल जीतेव,जिनगी ल हारत हंव|

बुता करथन; करके करेजा के चानी|

फेर फूले-लुवे-मिंसे के बेरा; गिरथे पानी|

मंय कॉपत हंव थर-थर,

सब कीथे  जॉंगर हे त का डर.......?

मोर सपना  ल  सरोय  बर,

अऊ आगे  बईरी बादर.................|


पड़े ले थपड़ा ,करके थोथना तिरछा|

सुसके कोला म,धनिया-मेथी-मिरचा|

बिगड़हा बनाय हे जनम जात,

भगवान  मोर  रासि |

मोर लगाय ऑलू-भॉटा-गोभी,

अरो  लेहे   फॉंसी |

किसानी ल धरम मान के,

सिधोथो खेत-खार,बखरी-बारी|

उद्धमी ब्यपारी मन हॉसथे ,

गरियाथे बेटा-बहू-सुवारी |

मन  ल  मनाथो ,

किसान होय के सजा पा डर.....|

सपना ल सरोय बर,

अऊ आगे बईरी बादर.............|

               जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

                     बाल्को( कोरबा)

                     ९९८१४४१७९५

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