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अऊ आगे बईरी बादर
तन म मॉस नई बॉचे हे,
अब हाड़ा ल घलो खा डर |
मोर सपना ल सरोय बर,
अऊ आगे बईरी बादर|
करेजा ल चानी करेबर,
फर म चना के पानी भरे बर|
रौंदें बर लाख-लाखड़ी ल|
बॉचे-खोंचे आस आखरि ल|
मसरंगी अरसी के फूल कस,
हिरदे म जागे रिहिस सपना|
राहेर सरसो कस खड़े रेंहेव,
बईरी हवा हलईस कतना|
लिड़िंग-लिड़िंग हालत रेंहेव,
अऊ आगे बिपत आगर....|
सरोय बर मोर सपना ल,
अऊ आगे बईरी बादर......|
मोर मंसूर ल मसके बर|
मारे टोंटा ल कसके धर|
मंय गंहू कस, गोहार पारत हंव|
जांगर ल जीतेव,जिनगी ल हारत हंव|
बुता करथन; करके करेजा के चानी|
फेर फूले-लुवे-मिंसे के बेरा; गिरथे पानी|
मंय कॉपत हंव थर-थर,
सब कीथे जॉंगर हे त का डर.......?
मोर सपना ल सरोय बर,
अऊ आगे बईरी बादर.................|
पड़े ले थपड़ा ,करके थोथना तिरछा|
सुसके कोला म,धनिया-मेथी-मिरचा|
बिगड़हा बनाय हे जनम जात,
भगवान मोर रासि |
मोर लगाय ऑलू-भॉटा-गोभी,
अरो लेहे फॉंसी |
किसानी ल धरम मान के,
सिधोथो खेत-खार,बखरी-बारी|
उद्धमी ब्यपारी मन हॉसथे ,
गरियाथे बेटा-बहू-सुवारी |
मन ल मनाथो ,
किसान होय के सजा पा डर.....|
सपना ल सरोय बर,
अऊ आगे बईरी बादर.............|
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को( कोरबा)
९९८१४४१७९५
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