Saturday, 9 February 2019

बसंत पंचमी (रोला छंद)

रितु बसंत(रोला छंद)

गावय  गीत बसंत,हवा मा नाचे डारा।
फगुवा राग सुनाय,मगन हे पारा पारा।
करे  पपीहा  शोर,कोयली  कुहकी पारे।
रितु बसंत जब आय,मया के दीया बारे।

बखरी  बारी   ओढ़,खड़े  हे  लुगरा  हरियर।
नँदिया नरवा नीर,दिखत हे फरियर फरियर।
बिहना जाड़ जनाय,बियापे  मँझनी बेरा।
अमली बोइर  आम,तीर लइकन के डेरा।

रंग  रंग  के साग,कढ़ाई  मा ममहाये।
दार भात हे तात,बने उपरहा खवाये।
धनिया  मिरी पताल,नून बासी मिल जाये।
खावय अँगरी चाँट,जिया जाँ घलो अघाये।

हाँस हाँस के खेल,लोग लइका मन खेले।
मटर  चिरौंजी  चार,टोर  के मनभर झेले।
आमा  अमली  डार, बाँध  के  झूला  झूलय।
किसम किसम के फूल,बाग बारी मा फूलय।

धनिया चना मसूर,देख के मन भर जावय।
खन खन करे रहेर,हवा सँग नाचय गावय।
हवे  उतेरा  खार, लाखड़ी  सरसो अरसी।
घाम घरी बर देख,बने कुम्हरा घर करसी।

मुसुर मुसुर मुस्काय,लाल परसा हा फुलके।
सेम्हर हाथ हलाय,मगन हो मन भर झुलके।
पीयँर  पीयँर   पात,झरे  पुरवा आये तब।
मगन जिया हो जाय,गीत पंछी गाये तब।

माँघ पंचमी होय,शारदा माँ के पूजा।
कहाँ पार पा पाय,महीना कोई दूजा।
ढोल नँगाड़ा झाँझ,आज ले बाजन लागे।
आगे  मास बसन्त,सबे कोती सुख छागे।

जीतेन्द्र कुमार वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को,कोरबा(छ्ग)

जय माँ शारदे,,,बसंत पंचमी की ढेरों बधाइयाँ💐💐💐💐

Sunday, 20 January 2019

छेरछेरा

छेरछेरा

दान अन्न धन के कर लौ गा,सुनके छेरिक छेरा।
जतके देहू  ततके बढ़ही,धन  दउलत शुभ बेरा।

पूस पाख मा पुन्नी के दिन,बगरे नवा अँजोरी।
परब  छेरछेरा  हा  आँटे,मया पिरित के डोरी।
धिनक धिनक धिन ढोलक बाजे,डंडा ताल सुनाये।
लइका  लोग  सियान  सबो मिल,नाचे  गाना  गाये।
थपड़ी कुहकी झाँझ मँजीरा,सुन छूटय दुख घेरा।
दान अन्न धन के कर लौ  गा,सुनके छेरिक छेरा।

दया  मया  सागर  लहरावै,नाचे जीवन नैया।
गोंदा गमकत हे अँगना मा,मन भावै पुरवैया।
जोरा करके जाड़ ह जाये,माँघ नेवता पाये।
बर पीपर हा पात गिराये,आमा हा मँउराये।
सेमी  गोभी  भाजी  निकले ,झूले  मुनगा  केरा।
दान अन्न धन के कर लौ गा,सुनके छेरिक छेरा।

भिक्षा  माँगव  मया  घोर के,दान  देव बन दाता।
भरे अन्न धन मा कोठी ला,सब दिन धरती माता।
राँध  कलेवा  खाव बाँट के,रिता रहे झन थारी।
झारव इरसा द्वेष बैर ला,टारव मिल अँधियारी।
सइमों  सइमों  करे खोर हा,सइमों  सइमों डेरा।
दान अन्न धन के कर लौ गा,सुनके छेरिक छेरा।

जीतेंद्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को(कोरबा)

Saturday, 19 January 2019

छेरछेरा

          छेरछेरा(सार छंद)

कूद  कूद के कुहकी पारे,नाचे   झूमे  गाये।
चारो कोती छेरिक छेरा,सुघ्घर गीत सुनाये।

पाख अँजोरी  पूस महीना,आवय छेरिक छेरा।
दान पुन्न के खातिर अड़बड़,पबरित हे ये बेरा।

कइसे  चालू  होइस तेखर,किस्सा  एक  सुनावौं।
हमर राज के ये तिहार के,रहि रहि गुण ला गावौं।

युद्धनीति अउ राजनीति बर, जहाँगीर  के  द्वारे।
राजा जी कल्याण साय हा, कोशल छोड़ पधारे।

आठ साल बिन राजा के जी,काटे दिन फुलकैना।
हैहय    वंशी    शूर  वीर   के ,रद्दा  जोहय   नैना।

सबो  चीज  मा हो पारंगत,लहुटे  जब  राजा हा।
कोसल पुर मा उत्सव होवय,बाजे बड़ बाजा हा।

राजा अउ रानी फुलकैना,अब्बड़ खुशी मनाये।
राज रतनपुर  हा मनखे मा,मेला असन भराये।

सोना चाँदी रुपिया पइसा,बाँटे रानी राजा।
रहे  पूस  पुन्नी  के  बेरा,खुले रहे दरवाजा।

कोनो  पाये रुपिया पइसा,कोनो  सोना  चाँदी।
राजा के घर खावन लागे,सब मनखे मन माँदी।

राजा रानी करिन घोषणा,दान इही दिन करबों।
पूस  महीना  के  ये  बेरा, सबके  झोली भरबों।

ते  दिन  ले ये परब चलत हे, दान दक्षिणा होवै।
ऊँच नीच के भेद भुलाके,मया पिरित सब बोवै।

राज पाठ हा बदलत गिस नित,तभो होय ये जोरा।
कोसलपुर   माटी  कहलाये, दुलरू  धान  कटोरा।

मिँजई कुटई होय धान के,कोठी हर भर जावै।
अन्न  देव के घर आये ले, सबके मन  हरसावै।

अन्न दान तब करे सबोझन,आवय जब ये बेरा।
गूँजे  सब्बे  गली  खोर मा,सुघ्घर  छेरिक छेरा।

टुकनी  बोहे  नोनी  घूमय,बाबू मन  धर झोला।
देय लेय मा ये दिन सबके,पबरित होवय चोला।

करे  सुवा  अउ  डंडा  नाचा, घेरा गोल  बनाये।
झाँझ मँजीरा ढोलक बाजे,ठक ठक डंडा भाये।

दान धरम ये दिन मा करलौ,जघा सरग मा पा लौ।
हरे  बछर  भरके  तिहार  ये,छेरिक  छेरा  गा  लौ।


जीतेन्द्र वर्मा "खैरझिटिया"
बाल्को(कोरबा)

Monday, 31 December 2018

नवा बछर

बधाई नवा बछर के(सार छंद)

हवे  बधाई   नवा   बछर   के,गाड़ा  गाड़ा  तोला।
सुख पा राज करे जिनगी भर,गदगद होके चोला।

सबे  खूँट  मा  रहे  अँजोरी,अँधियारी  झन  छाये।
नवा बछर हर अपन संग मा,नवा खुसी धर आये।
बने चीज  नित नयन निहारे,कान सुने सत बानी।
झरे फूल कस हाँसी मुख ले,जुगजुग रहे जवानी।
जल थल का आगास नाप ले,चढ़के उड़न खटोला।
हवे  बधाई  नवा  बछर  के,गाड़ा  गाड़ा  तोला----।

धन बल बाढ़े दिन दिन भारी,घर लागे फुलवारी।
खेत  खार  मा  सोना  उपजे,सेमी  गोभी  बारी।
बढ़े बाँस कस बिता बिता बड़,यश जश मान पुछारी।
का  मनखे  का  जीव जिनावर, पटे  सबो सँग तारी।
राम रमैया कृष्ण कन्हैया,करे कृपा शिव भोला-----।
हवे  बधाई  नवा  बछर के,गाड़ा  गाड़ा  तोला------।

बरे बैर नव जुग मा बम्बर,बाढ़े भाई चारा।
ऊँच नीच के भेद सिराये,खाये झारा झारा।
दया मया के होय बसेरा,बोहय गंगा धारा।
पुरवा गीत सुनावै सबला,नाचे डारा पारा।
भाग बरे पुन्नी कस चंदा,धरे कला गुण सोला।
हवे बधाई नवा बछर के,गाड़ा गाड़ा तोला---।

जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को(कोरबा)

Friday, 7 December 2018

सपना

...............सपना.............
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रतिहा रोत रहेंव,
रहि-रहि के सपना म |
डरे-डर म,सुते सुते,
दबे-दबे   दसना  म  |

जंगल गे रेहेंव,
पिकनिक मानेल |
करेन हो हल्ला,
नाचेन- गायेन |
भूँकर-भूँकर के,
गोल्लर कस,
उछर-उछर के खायेन |
मँउहा मारिस मितान मन,
मँय मन मडा़येव चखना म|
रतिहा रोत रेहेंव,
रहि-रहि के सपना म....|

जिंहा बँसरी बाजे,
तिहा डिस्को बाजत हे|
जिहा राहस राचे,
तिहा जुआ  मातत हे |
मॉस मछरी कस मजा,
नइहे मटर मखना म....|
रतिहा रोत रेहेंव,
रहि-रहि के सपना म...|

चारो मुड़ा सीसी-बॉटल,
अऊ गुटका पाऊच पड़े हे|
बीड़ी-सिकरेट म,
झुंझकुर झाड़ी अऊ पेड़़ जरे हे|
हुरहा हलिस पहाड़,
चपकागेव बड़का पखना म...|
रतिहा रोत रेहेंव,
रहि-रहि के सपना म............|

अलगागे गोड़ के जोंड़,
कुटी-कुटी टुटगे कनिहा,
दाई-ददा बरजत रिहिस,
अति करेल पिकनिक झनि जा|
टुटिस सपना ताहन कहॉ के पथना,
गोड़ खुसरे राहय खटिया के गँथना म..|
रतिहा रोत रेहेव,
रहि-रहि के सपना म........................|

सिरतोन म का ददा,
सपना म घलो नइ गोड़ तोड़वांव |
कान धरलेव अतलंगहा बन,
पिकनिक नई जांव |

             जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
              बाल्को(कोरबा)

Thursday, 6 December 2018

मुसवा (सार छंद)

मुसवा(सार छंद)

कुरकुर-कुरकुर करे रात दिन,मुसवा करिया करिया।
कुटी  कुटी  कपड़ा  ला  काटे,मति हा जाथे छरिया।

खा खा के भोगाये हावै,धान चँउर फर भाजी।
भँदई पनही घलो तुनागे,नइ बाँचत हे खाजी।
कभू खोधरे परवा छानी,अउ घर अँगना कोड़े।
तावा के रोटी ला झड़के,आरुग कुछु नइ छोड़े।
चोरो बोरो घर हर लागे,कोला परगे परिया---------।
कुरकुर-कुरकुर करे रात दिन,मुसवा करिया करिया।

गदबिद गदबिद भागे भारी,खटिया मा चढ़ जावै।
हाथ  गोड़  ला घलो ककोने,नींद  कहाँ  ले आवै।
कुरिया कोठी कोठा कोला,सबे खूँट हे कोरा।
मुसवा  लेड़ी  मा भरगे हे,पाठ पठउँहा बोरा।
बरी बिजौरी बाँचत नइहे,नइ बाँचत हे फरिया------।
कुरकुर-कुरकुर करे रात दिन,मुसवा करिया करिया।

साँप असन पुछी दिखत हे,खरहा कस हे काया।
मनखे  तनखे  ला  नइ घेपे,मुसवा के बड़ माया।
आँखी लाल ठाढ़ मूँछ हे,देख बिलैया भागे।
छेना खरही माटी होगे,घर हा डोलन लागे।
भारी उधम मचावत हावै,चीं चीं चीं चीं नरिया------।
कुरकुर-कुरकुर करे रात दिन,मुसवा करिया करिया।

जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को (कोरबा)

Thursday, 22 November 2018

मुक्ताहारा सवैया

जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"के सवैया छंद

1,गंगोदक सवैया(लीम के पेड़)
लीम के पेड़ देथे हवा रोज ताजा जगालौ सबे तीर हे काम के।
दाँत सफ्फा करै रोग राई हरै तोड़ चाबौ मुखारी सुबे शाम के।
फायदा का कहौं लीम के तेल के होय पाना ग डारा सबो दाम के।
बैठ पंछी घलो हा लुभाये जिया ला रखौ लीम के पेड़ ला थाम के।

2,सुमुखी सवैया(हाय पइसा)
धरा म खड़े मनखे मन देखव हाथ लमाय अगास हवै।
करै मनके धन मा तनके बल बुद्धि घलो सब नास हवै।
रुतोवय नीर जराय जिया बगरा अँधियार गियास हवै।
कहाँ करथे सत काम कभू रुपिया पइसा बस खास हवै।

3,मुक्ताहारा सवैया(जुलूम जुलूस के)
भरे रिस मा मनखे मन बार दिये कतको घर मोटर कार।
धरे लउठी चिचियावत हे लहरावत हे टँगिया तलवार।
गली घर खोर के होय उजार थमे पहिया चुप हाट बजार।
जुलूस जुलूम करे ग हजार नफा बर चार धरे हथियार।