Sunday, 5 July 2026

सरकारी दारू

 सरकारी दारू-सरसी छंद


गांव गांव मा दारू भट्ठी, खोलत हे सरकार।

मंद पियइया बाढ़त हावै, बाढ़त हावै रार।।


कोष भरे बर दारू बेंचय, शासन देखव आज।

नशा नाश ए कहि चिल्लावै, आय घलो नइ लाज।।

पीयैं बेंच भांज दरुहा मन, घर बन खेती खार।

गांव गांव में दारू भट्ठी, खोलत हे सरकार।।


दारू गांजा के चक्कर मा, होवत हवै बिगाड़।

मंद पियइया मनखें मन हा, लाहो लेवैं ठाड़।।

कहाँ सुधर पावत हे कोई, खावँय चाहे मार।

गांव गांव में दारू भट्ठी, खोलत हे सरकार।।


नशा करौ झन कहिके शासन, पीटत रहिथे ढोल।

मंद मिलत हावै सरकारी,  खुल जावत हे पोल।।

कथनी करनी मा अंतर हे, काय कहौं मुँह फार।

गांव गांव में दारू भट्ठी, खोलत हे सरकार।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को नगर कोरबा(छग)

अशिक्षा-सार छंद

 अशिक्षा-सार छंद


अनपढ़ रहिबे ता दुख भारी, झेले पड़थे भैया।

इती उती भागे बर लगथे, जैसे कुकुर बिलैया।।


काम करे नइ मति बेरा मा, फुटे घलो नइ बानी।

अपढ़ जान के दुनिया वाले, करथें नित मनमानी।।

देय सहारा कोनों हा नइ, मिलथें टाँग खिंचैया।

अनपढ़ रहिबे ता दुख भारी, झेले पड़थे भैया।।


 कोई हा नइ करे पुछारी, मारे रहिरहि ताना।

आज जुटा पाना नोहर हे, दुनों टेम के खाना।।

हाव भाव नइ देखे कोई, सब हें घाव करैया।

अनपढ़ रहिबे ता दुख भारी, झेले पड़थे भैया।।


अलगा देथें अड़हा कहिके,अउ सब जाथें जुरिया।

आये अभिशाप अशिक्षा हा, हले नेव घर कुरिया।।

हक माँगे हकलासी लगथे, डूबे लगथे नैया।

अनपढ़ रहिबे ता दुख भारी, झेले पड़थे भैया।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को,कोरबा(छग)

प्रिंट रेट के दुःख(MRP)- सरसी छंद

 प्रिंट रेट के दुःख(MRP)- सरसी छंद


आँय बाँय कीमत मा बिकथे, कतको अकन समान।

मूल्य लिखाये रहिथे भारी, देख निकलथे जान।।


दू रुपया के चीज घलो के, रइथे रेट पचास।

कतको मन खा जाथे धोखा, टूट जथे विश्वास।।

फिरिज फटाका दवा दरी के, धरे कोन हा कान।।

आँय बाँय कीमत मा बिकथे, कतको अकन समान।।


देखत हे सरकार घलो हा, तभो मुँदे हे नैन।

लूट मचे हे चारो कोती, आय कहाँ ले चैन।।

अधिकारी नेता बैपारी, गाँय मिला सुर गान।

आँय बाँय कीमत मा बिकथे, कतको अकन समान।।


एक बिसाये गार पछीना, एक भरे सन्दूक।

जेन ठगाये तेन बताये, काखर कर जा दुःख।

प्रिंट रेट झन होवै जादा, दै शासन हा ध्यान।

आँय बाँय कीमत मा बिकथे, कतको अकन समान।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)