Friday, 31 July 2026

आज के व्यवस्था ऊपर--कुंडलियाँ छंद

 आज के व्यवस्था ऊपर--कुंडलियाँ छंद


नेता मनके घर मिले, बोरा बोरा नोट।

कखरो डर उन ला नहीं, थरथर काँपय छोट।

थरथर काँपय छोट, चुकावैं पाई पाई।

बड़े खाय मिल बाँट, बने सब भाई भाई।

पइसा जेखर तीर, उही ए विश्व विजेता।

कुर्सी ला पोटार, खाय भारत ला नेता।


भारत भुइयाँ मा हमर, गजब मचे हे लूट।

मनखे आम पिसात हे, बड़का ला हे छूट।

बड़का ला हे छूट, करै रोजे मनमानी।

सुरसा कस मुह फार, खाय नित धन दोगानी।

धरम करम सत मान, बड़े मन हावैं बारत।

साथ देय सरकार, बढ़े आघू का भारत।


लंबा कर कानून के, धरे छोट के घेंच।

बात बड़े के होय ता, फँस जाये बड़ पेंच।

फँस जाये बड़ पेंच, करे का कोट कछेरी।

पद पइसा के तीर, लगावैं सबझन फेरी।

मूंदे आँखी कान, कलेचुप बनके खंबा।

देखे बस कानून, जीभ ला करके लंबा।


खीसा मा धनवान के, अफसर नेता नोट।

डरै आम जन देख के, वर्दी करिया कोट।।

वर्दी करिया कोट, सके छोटे मनखे ले।

गले कभू नइ दाल, बड़े मन उल्टा पेले।

नवें रथे दिनरात, छोट बन खम्भा पीसा।

अकड़ अमीर दिखाय, भरे हे कोठी खीसा।


फ्री के झोरे रेवड़ी, नेता अउ जन खास।।

आम आदमी  हे तभे, होवत हवे विकास।

होवत हवे विकास, फकत कुर्सी वाले के।

मर मोटा नइ पाय, आम जन ला सब छेंके।

कई किसम के टैक्स, देय पानी पी पी के।

मनखे आम कमाय, खाय नेता मन फ्री के।


करजा के दम मा बड़े, बड़े बने हे आज।

लोक लाज के डर नही, नइ हे सगा समाज।

नइ हे सगा समाज, कोन देखाये अँगरी।

रंभा रति नचवाय, मंद पी तीरे टँगड़ी।

इँखरे हे सरकार, भले मर जावैं परजा।

सकल सुरत पद देख, बैंक तक देवै करजा।


फर्जी फाइल ला धरे, होगे बड़े फरार।

रोक छोट के साइकिल, गरजै पहरेदार।

गरजै पहरेदार, दिखाके लउठी डंडा।

नाक तरी धनवान, लुटैं सब ला बन पंडा।

पद पा पूँजी जोर, करैं कारज मनमर्जी।

भागे तज के देश, बनाके फाइल फर्जी।


छोट मँझोलन के रहत, बचे हवै ईमान।

गिरथें उठथें रोज के, बड़े बड़े धनवान।

बड़े बड़े धनवान, चलैं पइसा के दम मा।

धर इज्जत ईमान, जिये छोटे मन कम मा।

जादा के ले चाह, नियत नइ देवैं डोलन।

चादर भीतर पाँव, रखैं नित छोट मँझोलन।


माया पइसा मा मिले, पइसा मा रस रास।

इज्जत देखे जाय नइ, पइसा हे यदि पास।

पइसा हे यदि पास, पास वो सब पेपर मा।

रखे जेन मा हाथ, पहुँच जाये वो घर मा।

पइसा मा धूल जाय, चरित अउ बिरबिट काया।

कोन पार पा पाय, जबर पइसा के माया।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

मर लगगे फोटू विडियो-कुकुभ छंद

 मर लगगे फोटू विडियो-कुकुभ छंद


कई काम ला चुपेचाप रहि, मनखे ला करना चाही।

सबे चीज के फोटू विडियो, सदा मान थोरे पाही।।


सेवा सत सुख गुण गियान ला, देखाये बर नइ लागे।

तोपे ढाँके के उघरत हे, उघरे के हा तोपागे।।

हवै मनुष के आय जातरी, धारेच धार बोहाही।

कई काम ला चुपेचाप रहि, मनखे ला करना चाही।।


बर बिहाव छट्ठी बरही के, समझ आय विडियो फोटू।

मरनी हरनी जलत लाश ला, नइ छोड़त हावय मोटू।।

रील बनाये के चक्कर मा, नवा जमाना बोहाही।

कई काम ला चुपेचाप रहि, मनखे ला करना चाही।।


फोटू विडियो मा हे नत्ता, असल बइठगे हे भट्ठा।

मरगे हावय मान मनुष के, भक्ति भाव होगे ठट्ठा।।

आँखी मूँदे बर लागत हे, अउ का काली देखाही।

कई काम ला चुपेचाप रहि, मनखे ला करना चाही।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को,कोरबा(छग)

Wednesday, 29 July 2026

पइसा अउ संगी- सार छन्द

 पइसा अउ संगी- सार छन्द


पइसा के राहत ले मिलथें, किसम किसम के संगी।

रोज चढ़ाथें चना झाड़ मा, ख्वाब दिखा सतरंगी।।


काम करयँ नइ कभू अकेल्ला, रटथें यारी यारी।

जुगत बनाथें खाय पिये के, घूम घूम के भारी।।

चाँटुकार के घोर चासनी, बात कहयँ बेढंगी।

पइसा के राहत ले मिलथें, किसम किसम के संगी।


जिया जीतथें जुरमिल फोकट, झूठमूठ कर दावा।

राहन नइ दय पहली जइसे, रंग रूप पहिनावा।।

बना डारथें सिधवा ला तक, अपने कस हुड़दंगी।

पइसा के राहत ले मिलथें, किसम किसम के संगी।


देवयँ नइ सुझाव फोकट मा, साहब बइगा गुनिया।

किसन सुदामा के जुग नोहे, मतलब के हे दुनिया।

रसा रहत ले चुहके मनभर, तजयँ देख के तंगी।

पइसा के राहत ले मिलथें, किसम किसम के संगी।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को,कोरबा(छग)


अइसनो संगी मन ला मित्रा दिवस के बधाई

Sunday, 26 July 2026

जब तक चुनाव रिहिस

 खातू-कुंडलियाँ छंद


खातू मनके राज मा, खातू बर लुलवान।

खातू ले खेती हवै, का अब करन किसान।।

का अब करन किसान, अधर मा हवै किसानी।

कोन सुने गोहार, कोन दै खातू पानी।।

हें जे जिम्मेदार, सबे खाए के पातू।

संसो खाए खूब, कतिक कब मिलही खातू।।


जीतेन्द्र वर्मा'₹"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)



जब तक चुनाव रिहिस


अच्छा दिन के हाव भाव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।

आम जनता के हियाव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।1


आव अउ समस्या बताव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।

अंडा मछरी भेल खाव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।2


तेल पानी गैस में ठहराव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।

नारा मा महँगाई दुरिहाव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।3


ईरान अमरीका संग जुराव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।

हारमुज ले बुलकत नाव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।4


संसो के नइ दिखत सिर पाँव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।

चारों खूंट विश्व गुरु के दबाव रिहिस, जब तक चुनाव रिहिस।।5


जीतेन्द्र वर्मा'"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)



गिरगिट जैसा रंग बदलो, राज करोगे।

समय देखके संग बदलो, राज करोगे।।

अपनो से लड़ रहे है, दुश्मन को छोड़कर,

तौर तरीका जंग बदलो, राज करोगे।।


अंग बदलो, राज करोगे।

जंग बदलो , राज करोगे।

बंग बदलो,, राज करोगे।

भंग बदलो,, राज करोगे।

सड़क तीर के तोर खेत मा-लावणी छंद

 सड़क तीर के तोर खेत मा-लावणी छंद


सड़क तीर के तोर खेत मा, नजर हवै बैपारी के।।

सावचेत हो जा जी मंगलू, लाज बचा बन बारी के।।


नपा नपा के खेत खार ला, गाँजत हें उन मन खरही।

उँखर हाथ जा महतारी हा, दिखत हवै निच्चट मरही।।

टावर गारा छत मा दरके, छाती हा महतारी के।

सावचेत हो जा जी मंगलू, लाज बचा बन बारी के।।


साम दाम अउ दंड भेद ले, भुइयाँ ला उन कब्जाथें।।

नाका बंदी कर पिछोत के, मनखें मन ला रोवाथें।।

औने पौने देय दाम उन, लेय लाभ लाचारी के।

सावचेत हो जा जी मंगलू, लाज बचा बन बारी के।।


शासन अफसर सँग पा गरजे, बरजे नइ कोनो उन ला।

सोन उपजइया महतारी मा, छीचत हें उन मन घुन ला।

लोभ आय झन अउ सताय झन, संसो दुनियादारी के।

सावचेत हो जा जी मंगलू, लाज बचा बन बारी के।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)




पाँव लमायेन जतिक जादा-सरसी छंद

 पाँव लमायेन जतिक जादा-सरसी छंद


पाँव लमायेन जतिक जादा, ततिक हवन परसान।

एक जमाना मा घर गाँव ह, सुख के लागे खान ।।


नइ माँगिस हे खपरा छानी, कभ्भू कूलर फ्रीज।

मुड़मिंजनी माटी के आघू, फेल लक्स अउ ब्रीज।।

छेना लकड़ी खाके हाँडी, हाँसे साँझ बिहान।

पाँव लमायेन जतिक जादा, ततिक हवन परसान।।


कोलाबारी के तरकारी, पारा ला दै तार।

नदिया नरवा बोरिंग कुआँ, बहे दूध कस धार।।

असली धन अरसी जौ सरसो, चना गहूँ अउ धान।

पाँव लमायेन जतिक जादा, ततिक हवन परसान।।


नीम आम अमली बर पीपर, देय फूल फर छाँव।

सिंहासन कस चौकउ चौरा, लगे सरग कस गाँव।

छत सीमेंट आय हे जब ले, तब ले हन हल्कान।

पाँव लमायेन जतिक जादा, ततिक हवन परसान।।


बबा कहानी रोज सुनावै, दाई लोरी गाय।

हाट सजे हर हप्ता हप्ता, चीज सबे मिल जाय।।

पेट संग मा जिया अघाये, गांव देय वरदान।

पाँव लमायेन जतिक जादा, ततिक हवन परसान।।



सुविधा दुविधा बनत जात, हाल होय बेहाल।

महँगाई के मार पड़त हे, मनुष बजावँय गाल।।

सुरता जुन्ना समय आत हे, काला काय बतान।

पाँव लमायेन जतिक जादा, ततिक हवन परसान।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

खेती किसानी के गत-सरसी छंद

 खेती किसानी के गत-सरसी छंद


विलासना के चीज बनाये, ते होगे धनवान।

साग दार फर अन्न उगाके, रावैं आज किसान।।


पानी पुरवा के सँग चाही, खाये खातिर अन्न।

फेर आज ये काय चलत हे, सोच होय मन सन्न।।

खाली पेट दिमाक चले नइ, भरे आय तब ज्ञान।

साग दार फर अन्न उगाके, रावैं आज किसान।।


जांगर खपगे नांगर खपगे, खपगे आस तमाम।

कतका रुपया का के मिलही, गढ़े आन मन दाम।

उद्योगी बैपारी फुदरे, मनके बेंच समान।

साग दार फर अन्न उगाके,रावैं आज किसान।।


बिजनेस बढ़े बढ़े नौकरी, खेती ले दुरिहाँय।

जे हे थेभा ये दुनिया के, तौने भटका खाँय।।

खेत किसानी आये जिनगी, पाय किसानी मान।

साग दार फर अन्न उगाके,रावैं आज किसान।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)