रार मचे हे खाड़ी मा
भात चुरे नइ काड़ी मा।
सोवा परगे हाँड़ी मा।
गैस सिरागे जेब चिरागे,
रार मचे हे खाड़ी मा।।
साग उगे नइ बाड़ी मा।
खेत पटागे झाड़ी मा।।
आफत हा अब अवसर बनगे,
लहू सुखागे नाड़ी मा।
रार मचे हे खाड़ी मा----
हें मजदूर दिहाड़ी मा।
फोकस हवैं खिलाड़ी मा।।
भला भरोसा काय करीं अब।
गुजराती मरवाड़ी मा।।
रार मचे हे खाड़ी मा----
दरद उठत हे माड़ी मा।
तेल सिरागे गाड़ी मा।।
पिसागेन पर के झगरा मा,
बइठे बइठे भाँड़ी मा।।
रार मचे हे खाड़ी मा----
कतकों बिकगे साड़ी मा।
कतकों दारू ताड़ी मा।
नेता ला बस कुर्सी चाही,
सोज बाय अउ आड़ी मा।
रार मचे हे खाड़ी मा----
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को, कोरबा(छग)
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