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Monday, 27 July 2020

सार छंद-जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया" तुलसी तोर रमायण(गीत)

सार छंद-जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

तुलसी तोर रमायण(गीत)

जग बर अमरित पानी बनगे, तुलसी तोर रमायण।
कतको के जिनगानी बनगे, तुलसी तोर रमायण।।

शब्द शब्द मा राम रमे हे, शब्द शब्द मा सीता।
गूढ़ ग्यान गुण गोठ गँजाये, चिटिको नइहे रीता।
सत सुख शांति कहानी बनगे, तुलसी तोर रमायण।
कतको के जिनगानी बनगे, तुलसी तोर रमायण।।

सब दिन बरसे कृपा राम के, दरद दुःख डर भागे।
राम नाम के महिमा भारी, भाग भगत के जागे।।
धर्म ध्वजा धन धानी बनगे, तुलसी तोर रमायण।
कतको के जिनगानी बनगे, तुलसी तोर रमायण।।

सहज तारथे भवसागर ले, ये डोंगा कलजुग के।
दूर भगाथे अँधियारी ला, सुरुज सहीं नित उगके।
बेघर के छत छानी बनगे, तुलसी तोर रमायण।।
कतको के जिनगानी बनगे, तुलसी तोर रमायण।

प्रश्न घलो कमती पड़ जाही, उत्तर अतिक भरे हे।
अधम अनाड़ी गुणी गियानी, सबके दुःख हरे हे।
मीठ कलिंदर चानी बनगे, तुलसी तोर रमायण।
कतको के जिनगानी बनगे, तुलसी तोर रमायण।

जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को, कोरबा(छग)

तुलसी दास जयंती की बहुत बहुत बधाई