तभो नेता मन के कद बाढ़े हे
पानी बिजली के हाल बेहाल हे।
डहर बाट मा खुदे नरवा ताल हे।।
नियम धियम गुंडा मन बनात हें,
न ढंग के स्कूल न अस्पताल हे।
विकास घोषणा पत्र मा माढ़े हे।
तभो नेता मन के कद बाढ़े हे।।
कपड़ा ओनहा बस सादा हे।
मन भीतर भराय खादा हे।।
पैसा पहुँच के बस पर लगाथे,
एको ठन पुरोये नइ वादा हे।।
जनता बर शनि साते साढ़े हे।
तभो नेता मन के कद बाढ़े हे।।
फूल माला के दीवाना ये मन।
जाने बस नित खाना ये मन।।
अपन जेब मा धरके रखें सदा,
कोर्ट कछेरी अउ थाना ये मन।
तभो जयकार करइया ठाढ़े हे।
तभे नेता मन के कद बाढ़े हे।।
जीतेंद्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को, कोरबा(छग)
कुंडलियाँ छंद-जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
रावन रावन हे तिंहा, राम कहाँ ले आय।
रावन ला रावन हने, रावन खुशी मनाय।
रावन खुशी मनाय, भुलाके अपने गत ला।
अंहकार के दास, बने हे तज तप सत ला।
धनबल गुण ना ज्ञान, तभो लागे देखावन।
नइहे कहुँती राम, दिखे बस रावन रावन।।
रावन के पुतला कहे, काम रतन नइ आय।
अहंकार ला छोड़ दव, झन लेवव कुछु हाय।
झन लेवव कुछु हाय, बाय हो जाही जिनगी।
छुटही जोरे चीज, धार बोहाही जिनगी।
मद माया अउ मोह, खोज के खुदे जलावन।
नइ ते जलहू रोज, मोर कस बनके रावन।
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को, कोरबा(छग)
विजय दशमी की आप सबको ढेरों बधाइयाँ
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