तिहार देख ले
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आ हमर गांव के , तिहार देख ले।
सुग्घर लीपे-पोते,घर दुवार देख ले।
काय हरे हरेली,काय हरे तीजा-पोरा।
कोन-कोन तिहार बर,कईसन होथे जोरा।
झुमय नाचे सबो झन,मिन्झरे पिंयार देख ले।
राखी सवनाही ,सोम्मारी कमरछठ।
रांध के कलेवा,खाथे सबो छक।
झुलना झूले कन्हैया,मिंयार देख ले।
मुसवा संग मुस्काये,गली-गली गनपति।
जस गाये दाई दुर्गा के,मनाये सरसती।
राम जी के जीतई अउ,रावन के हार देख ले।
रामधुनी रामसत्ता,भागवत रमायेन।
दियना देवारी के,जगमग जलायेन।
परसा संग माते,नाचे खेत-खार देख ले।
पूजा-पाठ बर-बिहाव,मड़ई अक्ति छेरछेरा।
सुवा-करमा अउ गम्मत म,बीते कतको बेरा।
नांव के तिहार नही,इहां सार देख ले।
जीतेंद्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को(कोरबा)
संकलित-गंवागे मोर गांव
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