कुंडलियां-रिचार्ज के नाम मा लूट
सरकारी आदेश हे, बिसा एक ठन फोन।
बिक जा भले रिचार्ज बर, सुध लेवव अब कोन।।
सुध लेवव अब कोन, मिले हें नेता अफसर।
महँगा फोन रिचार्ज, रुवावत रहिथे अक्सर।।
फोन जाय के छोड़, आय के तक लाचारी।
नम्बर सब मा जोड़, हुकुम हावै सरकारी।।
जीतेन्द्र वर्मा'खैरझिटिया"
बाल्को, कोरबा(छग)
जियो नाम रख मारथे, कहँव दुःख ला काय।
लूटमार के खेल हे, सेवा बनगे बाय।।
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