Friday, 27 February 2026

काबर लालेच म खेलथस???

 

काबर लालेच म खेलथस???


अऊ तो रंग बहुत हे,

काबर लालेच म काबर खेलथस?

हॉसत खेलत जिनगी म,

काबर बारूद मेलथस?


पीके पानी फरी,

जुडा़ अपन नरी,

फेर काबर लहू पियत हस?

मनखे अस ता, मन म समा,

रक्सा कस का जियत हस?


हरिंयर रंग हरागे हे,

ललहूं होगे हे माटी।

थोरकन तो दया धरम देखा,

का पथरा के हे तोर छाती?

भरके बंदूक म  गोली,

निरदई कस ठेलथस......

अऊ तो रंग ............

.............खेलथस  ???


बंदूक गईंज चलायेस,

अब भाईचारा भँजा के देख !

मारे हस जेखर गोंसईंया,बेटा ल,

ओखरो घर जाके देख,!.

मनखे होके मनखे ल ,                                                                                                                                                                     खावत हस नोंच नोंच !

फिलगे हे अचरा आंसू म,

अब ताे दाई के आंसू पोंछ !

छेदा छेदा के बम बारूद म,

दाई के छाती चानी हाेगे हे !

तरिया ढोंड़गा नरवा के पानी,

ललहुं  बानी होगे हे  !

कोन देखाथे ऑखी तोला,

बता!! का बात ल पेलथस?

अऊ तो रंग................

.....................खेलथस ??


अलहन ऊपर अलहन होत हे।

जंगल तीर के गांव रोज रोत हे।

कल्हरत हे कुंदरा,

 आँसू ढारत हे महतारी।

कब जिवरा ले डर भागही,

 कब टरही गोला बारी।।

खून खराबा बने नोहे,

आखिर दरद तो तहूँ झेलथस।

अऊ तो रंग.....................

..........................खेलथस?


जंगल के जीव जीवलेवा हे,

फेर तोर जइसे नही,!

कहां लुकाबे बनवासी बन,

जब श्री राम आ जही!

छीत मया के रंग,

अऊ खेल रंग गुलाल ले,!

नाच पारा -पारा बाजे नंगाडा़!

निकल जंगल के जाल ले!

खेल खेल म का खेले तैं,

मनखे के जीव लेलेय तैं,

अति के अंत हब ले होही,

बात मोर मान ले!

लड़ना हे त देश बर लड़,

छाती फूलाके शान ले!

फूल-फूलवारी मितान बना,

आखिर काखर बात ल एल्हथस??

अऊ तो रंग.....................

.............................खेलथस????


जीतेन्र्द वर्मा

खैरझिटी(राजनांदगांव)

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