Friday, 27 February 2026

लाली फूल सेंम्हर के

 लाली फूल सेंम्हर के

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आगे बसंत;कुहके कोयली,

परसा,आमा मन भाय हे|

सेंम्हर पेड़ घलो अपन तीर,

बइठे बर बलाय हे.............||


कॉटा   पेड़  भर   लटके   हे|

खाल्हे एकोठन नइ टपके हे||

हॉंसत  हे  के  रोवत  हे,

लाली  फूल  जँऊहर  घपटे हे ||

झर्राके  पाना फूल  ल,

पेड़ तरी सेज बनाय हे...........||

सेंम्हर पेड़ घलो अपन तीर,

बइठे   बर   बलाय हे..............||


लाली फूले हे तभो कोनो नइ भावत हे|

फगुवा   पूर्वाइया  म  उहू  ह गावत  हे|

कोन अब खाके वोला मुंहु रचावत हे|

मनखे के मया ले सेंम्हर दुरिहावत हे|

बाढ़े हे डंगडंग ले,

छंइहाँ बर डारा-खांधा लमाय हे||

सेंम्हर पेड़ घलो अपन तीर,

बइठे     बर   बलाय हे............||


तीर तखार म मनखे दिखे ल काहत हे|

एकेक ठन कॉंटा तनले झिंके ल काहत हे|

बसंत  म मंहु  मुचमुचाथो  फूल के,

कवि मन ल अपनो बारे में लिखे ल काहत हे|

एके घरी हाँसय एके घरी रोवय,

पाना गिराके फूले फूल म लदाय हे||

सेंम्हर पेड़ घलो अपन तीर,

बइठे बर  बलाय हे..............||


            जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

                   बाल्को(कोरबा)

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