Tuesday, 16 June 2026

सत्ता- कुंडलियाँ

 सत्ता- कुंडलियाँ


सत्ता बदलत देर हे, नइ दे कोनो साथ।

बदल लिही पाला अपन, मान आन ला नाथ।।

मान आन ला नाथ, तोर बर गड्ढा खनही ।

ताज तोरन छोड़, बचे नइ पग के पनही।।

राजनीति के खेल, आय पुरवा अउ पत्ता।

हे तब तक जयकार, हाथ हे जब तक सत्ता।।1


मुद्दा पंथ विचार ना, ना सत सुम्मत आय।

देख ताख के फायदा, नेता मन तिरियाय।।

नेता मन तिरियाय, देख के दल अउ बल ला।

निर्लज बन मुस्काय, भुला के करनी कल ला।।

सत्ता आघू दूम, हलावँय खाकें हुद्दा।

काय मान सम्मान, काय उंखर बर मुद्दा।।2


कुकुर घलो हा जानथे, पालिस पोसिस कोन।

राजनीति के खेल मा, का कौड़ी का सोन।।

का कौड़ी का सोन, मोल नइ चिन्हें सत्ता।

का सग अउ का आन, काम नइ आये नत्ता।।

होवत हे बदनाम, आज के संग कलो हा।

नेता जाथें भूल, चिन्हथे कुकुर घलो हा।।3


खेमा बदलैं हार मा, जीते अधम मचाय।

धरम करम ईमान नइ, उहिमन नेता ताय।।

उहिमन नेता ताय, जेन ला कुछ नइ लागे।

एती ओती होत, अपन धुन मा बस भागे।।

भूला तैं अउ तोर, जियत रहिथें नित में मा।

आयँ घलो नइ लाज, हार मा बदलैं खेमा।।4


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया

बाल्को कोरबा(छग)

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