Tuesday, 16 June 2026

पारा गरम हे

 पारा गरम हे


लइका मन के स्कूल खुलगे, पारा गरम हे।

गाड़ी पेलई मा सांस फुलगे, पारा गरम हे।।


बिन खातू के बोकबाय देखँय किसान मन।

कतको झन फाँसी झुलगे, पारा गरम हे।।


धान छोड़ कुछु आन उगावव कहै सरकार।

धान कटोरा के पेंदा उलगे, पारा गरम हे।।


बाढ़त बिजली बिल, लाइन घलो पदोवव।

देख मति एती ओती ढुलगे, पारा गरम हे।।


वाह रे जमाना, मोबाइल के पेट बर कमाना।

ब्याज के चक्कर मा मूल गे,पारा गरम हे।।


महँगा मोटर गाड़ी मन कबाड़ होही कथे।

ददा बबा के जमाना भुलगे,पारा गरम हे।।


अच्छा दिन मा ये हाल हे, बतावन काला,

ये देख बरफ घलो सुलगे, पारा गरम हे।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)


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