Thursday, 16 July 2026

दाई दिखथे........ --------------------------------------------

 ...........दाई दिखथे........

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दाई दिखथे,

ढेंकी के ठक-ठक में।

चुरोना के फट-फट में।

छेना के थप-थप में।

करछुल के खट-खट में।


दाई दिखथे,

अईरसा के पाग में।

भुंजे-बघारे साग में।

लोरी  के   राग   में।

अंचरा के ताग-ताग में।


दाई दिखथे,

गघरी-गुंडी के पानी में।

गुंगवात खपरा छानी में।

बरनी के आमा चानी में।

लईका के तोतवा बानी में।


दाई दिखथे,

चांड़ी-टिपली डुवा में।

घाट-घठौदा कुंवा में।

गौरा भड़ोनी सुवा में।

लईका-लोग के दुवा में।


दाई दिखथे,

तुलसी चंवरा के दिया में।

दुख-पीरा भरे जिया में।

सुखाय छानी के बरी में।

गंजाय कथरी के घरी में।


दाई दिखथे,

लीपे-पोते घर-दुवार में।

बासी माड़े मेड़-पार में।

साग-भाजी नार-बियार में।

बेटा-बेटी के संस्कार में।

       जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

           बाल्को(कोरबा)

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