गीत-मया
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फोकटे-फोकट मया,बदनाम होथे रे।
बुझथे बाती ; दीया के , नाम होथे रे।
ये झेख्खर टूरा , लफरहा मन।
बन - बदऊर के , थरहा मन।
गोल्लर कस मनखे , हरहा मन।
मया के रद्दा रेंगइया,अड़हा मन।
चढ़ मया के छानी म,आगी रुतोथे रे।
फोकटे-फोकट मया,बदनाम होथे रे।
जाने नही , पिरीत तभो।
गाथे मया के, गीत तभो।
दू दिन घलो नइ चले,
बदथे मितानी-मीत तभो।
सोरियाथे मयारू ल,जब काम होथे रे।
फोकटे-फोकट मया , बदनाम होथे रे।
मया तो जग ल ,देखाय के आय।
कोनहा म थोरे, लुकाय के आय।
मया करइया ल,सब कोनो भाथे,
मया बाँटे अउ , बताय के आय।
मया सबो बर होथे,मया धाम होथे रे।
फोकटे-फोकट मया,बदनाम होथे रे।
जीतेन्द्र वर्मा "खैरझिटिया"
बालको(कोरबा)
9981441795
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