Saturday, 22 November 2025

अरझगे बेर बर म

 ........अरझगे बेर बर म

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अगोरत हे बबा,

बड़ बेर ले बेर ल।

घाम उतरही कहिके,

देखत हे बर पेड़ ल।


हरियर-हरियर पाना म,

अरझगे सोनहा घाम।

बिन सेके तन ल,

नइ भाय बुता काम।


कथरी,कमरा म,

जाड़ जात  नइहे।

अंगरा,अंगेठा,भुर्री,

भात नइहे।


घाम के अगोरा म।

बबा बइठे बोरा म।

खेलाय नान्हे नाती ल,

बईठार अपन कोरा म।।


लामे डारा-खांधा,

अउ घम-घम ले छाये पाना।

बर पेड़ घेरी बेरी ,

बबा ल मारे ताना।


एक कन दिख के,लुका जात हे।

घाम बर बबा,भूखा जात हे।

करिया कँउवा काँव-काँव करत,

बिजरात हे बबा ल।

बिहनिया ले बिकट जाड़,

जनात हे बबा ल।


पँडकी,सल्हई,गोड़ेला,पुचपुची,

ए डारा ले वो डारा उड़ाय।

रिस म बबा बर पेड़ ल,

कोकवानी लउठी देखाय।


थोरिक बेरा म,

भुँइयॉ म घाम बगरगे।

बबा केहे लउठी देख,

बर पेड़ ह डरगे।


पाके घाम बबा हाँसत हे।

थपड़ी पीटत नाती सँग नाचत हे।

बइठे-बइठे मुहाटी म,

बबा घाम तापत हे।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बालको(कोरबा)

9981441795

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