Friday, 14 November 2025

तह विकास के-हाकलि छंद

 तह विकास के-हाकलि छंद


तह विकास के पोला हे।

सब खुँट विष के घोला हे।।

बरत गाँव घर टोला हे।

उसलत बारी कोला हे।।


खतरा तोला मोला हे।

बम बारुद गन गोला हे।।

गिरे फसल मा ओला हे।

सुख मासा अउ तोला हे।।


नेता मन बड़बोला हें।

जनता निच्चट भोला हें।।

नश्वर माटी चोला हे।

तब ले नखरा सोला हे।।


इक देखावत रोला हे।

घर भीतर हिंडोला हे।।

इक के हाथ फफोला हे।

चिरहा खीसा झोला हे।।


सत के निकलत डोला हे।

संगी सगा सपोला हे।।

मोला मोला मोला हे।

बरत जिया मा होला हे।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

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