Saturday, 22 November 2025

भाजी चना के

 भाजी चना के


भाजी चना के।

खा ले बना के।।

बढ़िया भूंज बघार,

चना दार नाके।।


खवाथे अंगरी चाँट,

जघा नइ रहै मना के।।

अब चना कम बोवाय,

रेट बढ़गे दनदनाके।


पहली मिल जाय,

सिर्फ चार अना के।

आज नइ घलो पाबे,

पांच छः कोरी गनाके।।


लुकाय लुकाय फिरत हे,

भाजी अपन गुण जनाके।।

बिजरात है मनखें मन ला,

बाजार हाट म आके।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

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