खेती अफीम के-सरसी छंद
धान कटोरा मा उपजत हे, गांजा चरस अफीम।
का होही अब छत्तीसगढ़ के, चढ़े करेला नीम।।
गोल्लर पइधे धान खेत मा, हें किसान मजबूर।।
हवे चमाचम बाड़ नसा के, मनखें तक ले दूर।।
पर नइ मारन सके परिंदा, हवें रखे बर टीम।
धान कटोरा मा उपजत हे, गांजा चरस अफीम।।।
बड़े बड़े पहिचान बताके, कतको एकड़ घेर।
सूट पहिर के करे किसानी, इँखरे हावँय बेर।।
दानी धर्मी इहिमन बनगें, लें लें के इस्कीम।।
धान कटोरा मा उपजत हे, गांजा चरस अफीम।।।
काय उगाही का ला खाहीं, कुच्छु समझ नइ आय।
लालच के खेती बाढ़त हे, करम धरम तिरियाय।।
खेती के होही का काली, दरकत हावय बीम।
धान कटोरा मा उपजत हे, गांजा चरस अफीम।।।
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बालको, कोरबा(छग)
लगथे अइसने मा दारू बंद होही। विकल्प आवत हे
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