......घर होना चाही.....
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मनखे अस त मों मया ल,
फरे हस त गुत्तुर फर होना चाही|
कर मनके;मन ल भाय त,
फेर ऊप्पर वाले के,डर होना चाही|
इतराबे धन के राहत ले,
फेर मरे म नसीब कबर होना चाही|
अत्तीक झन भूला अपनेच म,
दुनिया के घलो खबर होना चाही|
बड़े नई होय कोनो धन-दऊलत ले,
बड़का बने बर छाती जबर होना चाही|
चाहे महल-अटारी;फ्लेट ;बंगला राहय,
फेर वोला सबले पहिली घर होना चाही|
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया'
बाल्को(कोरबा)
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