बढ़त चमचाई- लावणी छंद
घर मा लड़त भिड़त हे टूरा, ददा बहिन माँ भाई ले।
अउ बाहिर मा रिस्ता जोड़े, रातउ दिन चमचाई ले।।
बात बात मा मुँहफट होके, नियम धियम गनवात रथे।
हक के बात घरे मा करथे, बाहिर मुड़ी नवात रथे।।
कथनी करनी जेखर करिया, ओहर बड़े कन्हाई ले।
घर मा लड़त भिड़त हे टूरा, ददा बहिन माँ भाई ले।।
ददा बनावत हे आने ला, दरदर भटका खावत हे।
देखावा के नत्ता जोरे, कुकुर बरोबर धावत हे।।
बाज आत नइहे धक्का खा, रहि रहि पुछी हलाई ले।
घर मा लड़त भिड़त हे टूरा, ददा बहिन माँ भाई ले।
चमचागिरी बढ़त हे भारी, आघू अउ अब का होही।
स्वभिमानी गिनके बाचे हे, कोन सुमत समता बोही।।
सत के बाना कोन थामही, उबर खुशामद खाई ले।
घर मा लड़त भिड़त हे टूरा, ददा बहिन माँ भाई ले।।
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को कोरबा(छग)
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