Monday, 21 September 2026

जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"के गीतिका छंद

 जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"के गीतिका छंद


दाई
तोर अँचरा के तरी मा,घाम हे ना जाड़ वो।
दूध पी मैं तोर दाई,गेंव अतका बाढ़ वो।
तोर पँवरी नित परँव मैं,जे सरग के छाँव वो।
मैं मया ले तोर दाई,झन कभू दुरिहाँव वो।1।

मया
आग इरसा के धरे हस,बोल हे चारी सहीं।
छोड़ के तैं प्रीत फोकट,काटथस आरी सहीं।
काखरो ले तोर काबर,नइ पटे तारी सहीं।
धर मया भर भर मुठा तैं,बाँट देवारी सहीं।2।

जेठ बैसाख
जेठ अउ बैसाख आथे,तब बियापे बेर हा।
का बतावँव बात मनके,घेर लेथे ढेर हा।
झाँझ ताते तात चलथे,चाम जलथे घाम मा।
धार धर झरथे पछीना,नइ लगे मन काम मा।3।

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