पड़ड़ी चंपा फूल के,गजरा लिए बनाय।
खोपा बीच लगाय हे, गली खोर ममहाय।
सेंदुर हे बिजुरी बरन, सोहे मांग के बीच।
पवन चलय चुंदी हलय, जिवरा लेवे खीच।
टिकली दिखय कपार मा, चंदा जइसन गोल।
पान खाय मुँह लाल हे,बोले गुरतुर बोल।
पहिरे फूली सोन के,चमचम चमकय नाक।
करन फूल हे कान मा, नरी हार के धाक।
माला मुँदी छभाय हे, का चाँदी का सोन।
पुतरी कस सँउहत लगे,काहत हौं सिरतोन।
लाली लुगरा गजब फभे,हाथ चुरी हे लाल।
सूरुज लाल लजात हे, लाल दिखत हे गाल।
मुंदरी अंगरी मा सजे,भरे भरे हे हाथ।
ककनी बनुरी जब बजे,भुलय चलइया पाथ।
करधन हे कइ ताग गे,होवय कतको बात।
सुघराई ला देख के,बुरई हवे भगात।
छुनुर छुनुर पैरी करय, बिछिया छाँटी पांव।
जेवर हे हर अंग मा, कइसे महिमा गांव।
महक भरे हे सरीर मा, एड़ी महुर लगाय।
गहना गुठिया गोदना,देखय परी लजाय।
जीतेंद्र वर्मा
बालको(कोरबा)
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