सड़क तीर के तोर खेत मा-लावणी छंद
सड़क तीर के तोर खेत मा, नजर हवै बैपारी के।।
सावचेत हो जा जी मंगलू, लाज बचा बन बारी के।।
नपा नपा के खेत खार ला, गाँजत हें उन मन खरही।
उँखर हाथ जा महतारी हा, दिखत हवै निच्चट मरही।।
टावर गारा छत मा दरके, छाती हा महतारी के।
सावचेत हो जा जी मंगलू, लाज बचा बन बारी के।।
साम दाम अउ दंड भेद ले, भुइयाँ ला उन कब्जाथें।।
नाका बंदी कर पिछोत के, मनखें मन ला रोवाथें।।
औने पौने देय दाम उन, लेय लाभ लाचारी के।
सावचेत हो जा जी मंगलू, लाज बचा बन बारी के।।
शासन अफसर सँग पा गरजे, बरजे नइ कोनो उन ला।
सोन उपजइया महतारी मा, छीचत हें उन मन घुन ला।
लोभ आय झन अउ सताय झन, संसो दुनियादारी के।
सावचेत हो जा जी मंगलू, लाज बचा बन बारी के।।
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को, कोरबा(छग)
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