वाटर पार्क-सरसी छंद
वाटर पार्क म नाहै खातिर, मनखें मन जुरियाँय।
तिरिथ बरोबर तरिया तज के, डबरा म हें मुडाँय।।
घाट घठौंदा अरदा परदा, नइ हावै कुछु चीज।
बेढंगा सब झुमरत दिखथें, नइहें तौर तमीज।।
मजा मजा कहि मान बेंच के, छोट बड़े इतराँय।
तिरिथ बरोबर तरिया तज के, डबरा म हें मुडाँय।।
देहाती मन तँउरे तरिया, कहि नइ झाँकैं पार।
तेन तउल मा पानी पाके, होगे हें मतवार।।
मारे डींग खिंचाये फोटू, सुधबुध अपन भुलाँय।
तिरिथ बरोबर तरिया तज के, डबरा म हें मुडाँय।।
नवा उदिम बैपारी मन के, आये सब ला रास।
देखे सुने म अटपट लागे, उड़े मनुष बन तास।।
नवा जमाना के बाजार म, लाज शरम बेंचाँय।
तिरिथ बरोबर तरिया तज के, डबरा म हें मुडाँय।।
जीतेन्द्र वर्मा'खैरझिटिया'
बाल्को,कोरबा(छग)
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