Friday, 29 May 2026

खातू-कुंडलियाँ छंद

 खातू-कुंडलियाँ छंद


खातू मनके राज मा, खातू बर लुलवान।

खातू ले खेती हवै, का अब करन किसान।।

का अब करन किसान, अधर मा हवै किसानी।

कोन सुने गोहार, कोन दै खातू पानी।।

हें जे जिम्मेदार, सबे खाए के पातू।

संसो खाए खूब, कतिक कब मिलही खातू।।


जीतेन्द्र वर्मा'₹"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)


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