मुसवा हाथी जइसे(मात्रा-16,12)
छत्तीसगढ़ मा पाए जाथे, मुसवा हाथी जइसे।
सात करोड़ी धान डकारे, खबर आय हे अइसे।।
चांटी खाही अब पर्वत ला, दिंयार लोहा सोना।
निगल जही अजगर धरती ला, नइ बाँचे कुछु कोना।।
दूध दही गुड़ माखन मिश्री, कहही पथरा खइसे।
छत्तीसगढ़ मा पाए जाथे, मुसवा हाथी जइसे।।
जंगल ला छेरी हा चरके, लगथे बिरान करही।
नवा सड़किया उजड़ जही अब, रेंगय बछिया मरही।।
सागर के पानी पी जाही, बूड़े बुढ़वा भइसे।
छत्तीसगढ़ मा पाए जाथे, मुसवा हाथी जइसे।।
रखवारे के नीयत नइहे, देन कोन ला बद्दी।
कोन जनी कल का हो जाही, गोल्लर तिर हे गद्दी।।
ये कलजुग अउ राजपाठ के, होही विनाश कइसे।
छत्तीसगढ़ मा पाए जाथे, मुसवा हाथी जइसे।।
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को,कोरबा(छग)
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