Saturday, 24 January 2026

देस बर जीबो , देस बर मरबों

 देस   बर   जीबो , देस  बर  मरबों

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चल माटी के काया ल,हीरा करबों।

देस   बर  जीबो, देस   बर  मरबों।

सिंगार करबों,सोन चिरँइया के।

गुन ल गाबोंन,भारत मइया  के।

सुवारथ के  सुरता ले, दुरिहाके।

धुर्रा चुपर के माथा म,भुँइया के।

घपटे अँधियारी भगाय बर,भभका धरबों।

देस    बर      जीबो, देस    बर     मरबों।


उँच    -  नीच    ल, पाटबोन।

रखवार बन देस ल,राखबोन।

हवा   म      मया ,  घोरबोन।

हिरदे ल हिरदे  ले, जोड़बोन।

चल  दुख - पीरा  ल, मिल  के  हरबों।

देस   बर   जीबों,   देस    बर  मरबों।


मोला गरब - गुमान हे,

ए   भुँइया   ल  पाके।

खड़े   रहूं   मेड़ो   म ,

जबर छाती फइलाके।

फोड़ दुहूँ वो आँखी ल,

जे मोर माटी बर गड़ही।

लड़हूँ  -  मरहूँ  देस बर ,

तभे काया के करजा उतरही।

तँउरबों बुड़ती समुंद म,उग्ति पहाड़

चढ़बों।

चल   देस    बर   जीबो,   देस   बर  

मरबों।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को (कोरबा) 

09981441795

गणतंत्रता दिवस की ढेरों बधाइयाँ

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