Thursday, 22 January 2026

कविता ला।

 विश्व कविता दिवस के सादर बधाई


विश्व कविता दिवस म


अन्तस् मा आगी होथे, ता कविता नइ लिखाय।

 मन कहूँ बागी होथे, ता कविता नइ लिखाय।

चाल चरित दागी होथे, ता कविता नइ लिखाय।

काया पाप के भागी होथे, ता कविता नइ लिखाय।

बोचकहा कहूँ पागी, ता कविता नइ लिखाय।


ता कब लिखाथे-

संग मा संगी मीत होथे, ता कविता लिखाथे।

जिनगी मा जय जीत होथे,ता कविता लिखाथे।

मन मा मया प्रीत होथे, ता कविता लिखाथे।

जीये के बने रीत नीत होथे,ता कविता लिखाथे।

अन्तस् मा जब गीत होथे, ता कविता लिखाथे।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया


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कविता ला।


तुरते ताही कागज मा झन छपन दे कविता ला।

अंतस के आगी मा थोरिक तपन दे कविता ला।


सागर मंथन कस मन ला मथ,निकाल अमरित।

कउड़ी के दाम कभू,  झन नपन दे कविता ला।


बइठ गेहे मन मार के, थक हार के यदि कोई।

भरे उन मा जोश जज्बा ता, अपन दे कविता ला।


कवि करम मा तोर मोर के, चिट्को जघा नइहे।

पर हित खातिर सबदिन, खपन दे कविता ला।


बने गिनहा के फैसला पढ़इया मन करहीं खैरझिटिया।

ओन्हा चेन्द्रा कस चिरा चिरा के, कपन दे कविता ला।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को,कोरबा(छग)

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