Thursday, 22 January 2026

नवा साल

 नवा साल


हमर बर नवा का,अउ का जुन्ना रे नवा साल।

सबर दिन रथे, काठा कोठी उन्ना रे नवा साल।1


कोंटा मा परे हें, काली के संसो मा बबा ददा। 

मंद पीके नाचत हें, मोंटू मुन्ना रे नवा साल।।2


सियान मन जिनगी बिताइन, अपन मुठा बांध के,

आज चाबत हे मनखे मन ला, चुन्ना रे नवा साल।।3


नवा जमाना मा होवत हे, अड़बड़ नवा नवा उदिम,

संस्कृति संस्कार मा लगत हे, घुन्ना नवा साल।।4


होटल ढाबा मरत ले, भीड़ भाड़ दिखत हे,

ठिहा ठौर दिखत हे निचट, सुन्ना रे नवा साल।।5


आज के मनखें काली का करही, का पता?

देखावा मा झूलत हें सब, झुन्ना रे नवा साल।।6


ना नरियर अगरबत्ती, ना खीर ना पूड़ी भाये उनला,

बोकरा खाके नाचत हें, ताता तुन्ना रे नवा साल।7


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

No comments:

Post a Comment