अमीर ए ना--
इज्जत गँवाके वो इज्जत वाला हे, अमीर ए ना।
कोन का कहे सबके मुँह मा ताला हे, अमीर ए ना।
बने करइया मन बन बन भटकत रहिथे रात दिन।
पाये आसन काम जेखर काला हे, अमीर ए ना।।
भगत के पथरा मा पात पानी घलो नइ चढ़त हे।
ओखर देवाला मा भगवान बाला हे, अमीर ए ना।
रोज चढ़थे रोज उतरथे कई किसम के नकाब।
उँहचे मरहम, उँहचे बरछी भाला हे, अमीर ए ना।
पानी मिला पी जथे खून,मनखे होय के गुण हे शून।
गिनाये बर धन दोगानी महल माला हे, अमीर ए ना।
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को, कोरबा(छग)
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