खून पछीना-लावणी छंद
खून पछीना पानी होगे, कदर कहाँ कोनो करथें।
कई खपा जाँगर मर जावँय, कई हदर दोंदर भरथें।।
धनी बली बैपारी नेता, राज करैं चारो कोती।
यशजश बाढ़ें इँखरे मनके, फुले फले मूंगा मोती।।
पापी तन ला पाक मान के, इँखरे पग सबझन परथें।
खून पछीना पानी होगे, कदर कहाँ कोनो करथें।।
देखावा के हवै जमाना, जउन दिखे तउने बिकथें।
कोट कछेरी संग देवता, भाग घलो इँखरें लिखथें।।
सत सुमंत अउ भला कला के, खेती ला सबझन चरथें।।
खून पछीना पानी होगे, कदर कहाँ कोनो करथें।
मिले पछीना गारा मा हे, वो जिनगी कारा मा हे।
खून देवइया खुर्चत दिखथें, मान गउन नारा मा हे।।
भाग बनइया जे कहिलाये, भूख प्यास तउने मरथें।।
खून पछीना पानी होगे, कदर कहाँ कोनो करथें।
जीतेन्द्र वर्मा'खैरझिटिया'
बाल्को,कोरबा(छग)
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