*मर लग गे फोटू विडियो-सार छंद*
होवत नइहें एक्को बूता, बिन हल्ला गुल्ला के।
धन दौलत इज्जत नइ बाँचे, घर दुवार खुल्ला के।।
तोपे ढाँके भात साग ला, कोन जुठारे सकही।
फेर मनुष मन आज बने हें, सिरतों जकहा जकही।।
सबे दिखावा मा बइठे हें, गाड़ा ला उल्लाके।
धन दौलत इज्जत नइ बाँचे, घर दुवार खुल्ला के।।
ददा छोड़के सगा छोड़के, धरे हवें मोबाइल।
फोटू विडियो बना बना के, मारत हें स्टाइल।।
फोटू के बिन होय भजन नइ, पंडित ना मुल्ला के।
धन दौलत इज्जत नइ बाँचे, घर दुवार खुल्ला के।।
देखइया मन देखत रइहीं, काम आय नइ एको।
गुण गियान के जिहाँ कदर नइ, तिहाँ कुच्छु झन फेको।।
तन मन ला कर देथे कँगला, आदत कहकुल्ला के।
धन दौलत इज्जत नइ बाँचे, घर दुवार खुल्ला के।।
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को, कोरबा(छग)
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