Thursday, 22 January 2026

उही आम आदमी ए।

 उही आम आदमी ए।


करजा लेके मूड़ नवाय हे, उही आम आदमी ए।

थारी चाँट खाना खाय हे, उही आम आदमी ए।।


ना बन सकिस इती के, ना बन सकिस उती के।

बड़े छोट बीच बोजाय हे, उही आम आदमी ए।।


छोट मोट नवकरी धर, नित नवके चलत हे।

सबके नजर मा आय हे, उही आम आदमी ए।


नियम कानून मानथे, मानथे मान मर्यादा।

बात बात मा घबराय हे,उही आम आदमी ए।


देश वेश रीत नीत, सब हावय इंखरेच थेथा।

धन कमाय हे ना गँवाय हे,उही आम आदमी ए।


जीतेंन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

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