तभो नेता मन के कद बाढ़े हे
पानी बिजली के हाल बेहाल हे।
डहर बाट मा खुदे नरवा ताल हे।।
नियम धियम गुंडा मन बनात हें,
न ढंग के स्कूल न अस्पताल हे।
विकास घोषणा पत्र मा माढ़े हे।
तभो नेता मन के कद बाढ़े हे।।
कपड़ा ओनहा बस सादा हे।
मन भीतर भराय खादा हे।।
कुर्सी ला पोटारे रथे सबदिन,
एको ठन पुरोये नइ वादा हे।।
जनता बर शनि साते साढ़े हे।
तभो नेता मन के कद बाढ़े हे।।
फूल माला के दीवाना ये मन।
जाने बस नित खाना ये मन।।
अपन जेब मा धरके रखें सदा,
कोर्ट कछेरी अउ थाना ये मन।
तभो जयकार करइया ठाढ़े हे।
तभे नेता मन के कद बाढ़े हे।।
जीतेंद्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को, कोरबा(छग)
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