भारतीय रेल और हिंदी छत्तीसगढ़ी गीत संगीत: एक संछिप्त अध्ययन
भारतीय रेल को भारत की जीवन रेखा कहा जाता है। यह केवल यात्रा और सामान ढुलाई का साधन नहीं है, बल्कि मनोरंजन और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का भी एक सशक्त माध्यम है। फिल्मों, गीतों और एल्बमों में रेलगाड़ी को विशेष स्थान दिया गया है, चाहे वह बॉलीवुड हो या क्षेत्रीय सिनेमा या एल्बम। रेलगाड़ी का सफर हर किसी के जीवन में किसी न किसी रूप में जुड़ा हुआ है, और बहुत कम लोग होंगे जिन्होंने रेल यात्रा का अनुभव न किया हो।
"रेल" शब्द अंग्रेज़ी से और "गाड़ी" शब्द हिंदी से मिलकर बना है, जबकि शुद्ध हिंदी में इसे "लोहपथगामिनी" कहा जाता है। अंग्रेजों ने 1837 में मद्रास में माल ढुलाई के लिए "रेल हिल" नामक मालगाड़ी का सर्वप्रथम प्रयोग किया था। बाद में यात्री परिवहन के लिए इसका विस्तार हुआ। भारत में यात्रियों के लिए पहली रेलगाड़ी 16 अप्रैल 1853 को मुंबई से ठाणे के बीच चली थी। यह घटना भारतीय परिवहन इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिनी जाती है। भारत में पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन 1925 में बॉम्बे सिटी से पुणे के बीच चली।
भारतीय रेल का अपना एक अलग वृहद बजट होता है, और इसे स्वतंत्र रूप से संचालित किया जाता है। भारतीय रेल के जनक लॉर्ड डलहौजी को माना जाता है, जिन्होंने भारत में रेल को प्राथमिकता दी और इसके विस्तार की नींव रखी। 1951 में भारतीय रेल का राष्ट्रीयकरण किया गया और 42 विभिन्न रेलवे कंपनियों को मिलाकर छह क्षेत्रों में विभाजित किया गया।
आज भारतीय रेल का नेटवर्क लगभग 115,000 किलोमीटर लंबा है और यह एशिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है। रोज़ाना लगभग 2.35 करोड़ यात्री रेल से सफर करते हैं, जो महाद्वीपीय देश ऑस्ट्रेलिया की कुल जनसंख्या से भी अधिक है। वर्तमान में भारतीय रेल के 19 जोन हैं, जिसमें बिलाससपुर 16 वे जोन के अन्तर्गत सम्मिलित है। अमेरिका, चीन और रूस के बाद रेल नेटवर्क के रूप में भारतीय रेल चौथे स्थान पर आता है।
भारतीय रेल भीड़ का सामना करने में दुनिया की सबसे बड़ी व्यवस्था है। यह केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि आजीविका और अर्थव्यवस्था का अद्भुत आधार भी है। रेलगाड़ी भारतीय जीवन का अभिन्न अंग है—यात्रा, संस्कृति, साहित्य और मनोरंजन सभी में इसकी गहरी छाप है। यह न केवल लोगों को उनके गंतव्य तक पहुँचाती है, बल्कि भारत की सामाजिक और आर्थिक संरचना को भी मजबूती प्रदान करती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 1930 के अमेरिकी मूक फ़िल्म में पहली बार ट्रेन को दिखाया गया। भारतीय सिनेमा में ट्रेन का दृश्य 1940 के बाद की फ़िल्मों में दिखाई देने लगा। सम्भवतः जवाब (1942) ही वह फ़िल्म है जिसमें पहली बार ट्रेन का दृश्य और ट्रेन को लेकर गीत प्रस्तुत किया गया। पुराने समय के कुछ गीत विशेष रूप से ट्रेन में गाए गए हैं। नए फ़िल्मों में तो ऐसे अनेक गीत मिल जाते हैं, पर यहाँ कुछ पुराने गीतों के नाम और उनकी फ़िल्मों के नाम प्रस्तुत हैं, जो ट्रेन में गाए गए हैं।
- तूफ़ान मेल, दुनिया ये दुनिया – जवाब (1942)
- आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ – जागृति (1954)
- देख तेरे संसार की हालत – नास्तिक (1954)
- बस्ती बस्ती, पर्वत पर्वत – रेलवे प्लेटफॉर्म (1955)
- है अपना दिल तो आवारा – सोलहवाँ साल (1958)
- औरतों के डब्बे में – मुड़ मुड़ के ना देख (1960)
- मैं हूँ झूम झूम झूमरू – झूमरू (1961)
- मुझे अपना यार बना लो – बॉय फ्रेंड (1961)
- मैं चली, मैं चली – प्रोफेसर (1962)
- रुख से ज़रा नक़ाब हटा दो – मेरे हुज़ूर (1968)
- मेरे सपनों की रानी – आराधना (1969)
- हम दोनों दो प्रेमी – अजनबी (1974)
- गाड़ी बुला रही है – दोस्त (1974)
- होगा तुमसे प्यारा कौन – ज़माने को दिखाना है (1977)
- पल दो पल का साथ हमारा – द बर्निंग ट्रेन (1980)
- हाथों की चाँद लकीरों का – विधाता (1982)
- सारी दुनिया का बोझ हम उठाते हैं – कुली (1983)
- साजन मेरा उस पार है – गंगा, जमुना, सरस्वती (1988)
-यूँ ही कट जाएगा सफ़र- हम हैं राही प्यार के(1993)
- कब से कर रहे हैं तेरा इंतज़ार – कभी हाँ कभी ना (1994)
- छैया छैया – दिल से (1998)
- कस्तो मज़ा है रेलैमा – परिणीता (2005)
- मनु भैय्या क्या करेंगे – तनु वेड्स मनु (2011)
रेल से सम्बंधित नामो को लेकर भी भारतीय सिनेमा में सैकड़ो फिल्म बनाएं गए है, कुछ चर्चित फिल्मो के नाम इस प्रकार है-
-रेलवे प्लेटफार्म(1955)- अभिनेता सुनीलदत्त, ये फिल्म एक ट्रेन स्टेशन पर फंसे यात्रियों और उनके बीच एक प्रेम त्रिकोण के इर्द-गिर्द घूमती है।
-ट्रेन टू पाकिस्तान (1998, हिंदी/पंजाबी) – खुशवंत सिंह के उपन्यास पर आधारित, विभाजन के समय ट्रेन और उससे जुड़ी त्रासदी पर केंद्रित।
-द बर्निंग ट्रेन (1980) – लगभग ट्रेन पर ही फिल्माया गया है।
-द ट्रेन (2007, हिंदी) – इमरान हाशमी अभिनीत रोमांटिक थ्रिलर, ट्रेन यात्रा और रहस्य कथा पर केंद्रित।
-प्लेटफार्म(2993)-अजय देवगन अभिनीत
-चेन्नई एक्सप्रेस (2013) – शाहरुख़ खान और दीपिका पादुकोण की सुपरहिट फ़िल्म, जिसका नाम और कहानी दोनों ट्रेन यात्रा से जुड़ी हैं।
-लव एक्सप्रेस (2011) – एक हल्की-फुल्की रोमांटिक कॉमेडी, जिसमें ट्रेन यात्रा के दौरान कहानी आगे बढ़ती है। इसके आलावा और भी कई फिल्म हैं।
बॉलीवुड सिनेमा में ट्रेन को लेकर कई प्रसिद्ध गीत बने हैं। कुछ उल्लेखनीय गीत इस प्रकार हैं:
- तूफ़ान मेल दुनिया रे दुनिया – फ़िल्म जवाब (1942)
- गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है – फ़िल्म दोस्त (1974)
- छुक-छुक छुक-छुक रेलगाड़ी, रेलगाड़ी – अशोक कुमार द्वारा गाया गया गीत, फ़िल्म आशीर्वाद (1968)
- दिल्ली से रेलगाड़ी छुक-छुक आएगी, गुड्डे की डैडी जी को लाएगी– फ़िल्म सुहाग
- कोई हसीना जब रूठ जाती है तो… स्टेशन से गाड़ी जब छूट जाती है – फ़िल्म शोले (1980)
- राम करे टूट जाए रेलगाड़ी, मेरे साजन को जो ना लाई – फ़िल्म रुपए दस करोड़ (आशा भोसले का गीत)
- मुंबई से रेल चली, दिल्ली से रेल चली – फ़िल्म लव मैरिज (1984)
- इंजन की सीटी में म्हारे मन डोले, चला चला रे ड्राइवर गाड़ी होले-होले – फ़िल्म माँ,
इसके अतिरिक्त और भी कई गीत है।
छत्तीसगढ़ी गीतों में भी रेलगाड़ी को लेकर कई चर्चित और पुराने गीत मिलते हैं। कुछ प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं:
- कायाखंडी भजन – कैसा रेल बनाया जी? ए गा बनाने वाला कैसा रेल बनाया जी?
- निकल जाबो रेल बैठ के – एक लोकप्रिय लोकगीत।
- धुर्वाराम मरकाम और दुखिया बाई का गाया हुआ गीत – रेलगाड़ी छुक-छुक रेलगाड़ी छुक-छुक। रायपुर ले ये छूटे रे संगी, राजनांदगांव मा रुक-रुक। रेलगाड़ी छुक-छुक रेलगाड़ी छुक-छुक।
- गोरेलाल बर्मन का सुमधुर गीत – तोर मोर माया के रेलगाड़ी गोरी सनसनानन चलन दे वो। नैन मिलाके टिकट कटाले, दोनों के बैठे के जगह बनाले। हरा बत्ती ला जलन दे न वो। तोर मोर माया के रेलगाड़ी गोरी सनसनानन चलन दे न वो।
- एक बहुप्रचलित ददरिया- गाड़ी पछिन्दर छुकछुक करथे। तोला नइ देखों ता दिल धुकधुक करथे, छूट जाही वो परान।
- रेलगाड़ी रेलगाड़ी रेलगाड़ी रेल… चलो चली मिलके खेलबो, रेलगाड़ी खेल। रेलगाड़ी रेलगाड़ी रेलगाड़ी रेल… (यह गीत रेडियो में अक्सर बजता था और श्रोताओं को बहुत भाता था।) छत्तीसगढ़ी में और भी कई नए गीत है।
रेल सम्बंधी हजारों कविताओं में कुछ हिंदी कवि और उनकी रेल-आधारित कविताएँ प्रस्तुत है-
- आलोकधन्वा – कुछ चीज़ें अब भी अच्छी हैं (रेल यात्रा से जुड़ा अनुभव)
- पंकज चतुर्वेदी – इच्छा (रेल संदर्भित कविता)
- अरुण कमल – डेली पैसेंजर (रेल यात्री का जीवन)
- संदीप तिवारी – घुमक्कड़ लड़की (रेल यात्रा का चित्रण)
- उदय प्रकाश – रेलपथ (रेल और जीवन का रूपक)
- निलय उपाध्याय – सफ़र, यात्रा, मुझे जिलाए रखने वाले का पता (रेल यात्रा और जीवन दर्शन)
- विनोद कुमार शुक्ल – ट्रेन (रेल और संवेदनाओं का मेल)
- राजेश जोशी – एक रेल गुज़रती है (रेल और समय का प्रतीक)
- वीरेन डंगवाल – बैठना है तुम्हारे (रेल इंजन और जीवन का रूपक)
- रवि भूषण पाठक – भाप इंजन (रेल इंजन पर कविता)
- हेमंत देवलेकर – रेल (रेल और यात्राओं का चित्रण)
छत्तीसगढ़ के कवियों ने भी छत्तीसगढ़ी और हिंदी में रेलगाड़ी को लेकर कविताएँ लिखी हैं। इनमें सुरेश पैगवार, संतोष मिरी, रामरतन श्रीवास, बलराम चंद्राकर जैसे कवि प्रमुख हैं। इसके अलावा और भी कई कवि हैं जिन्होंने रेलगाड़ी को विषय बनाकर अपनी कविताओं में चित्रण किया है।
बलराम चंद्राकर की बागीश्वरी सवैया उदाहरण स्वरूप प्रस्तुत है-
चले रेलगाड़ी इहाँ ले वहाँ जी, सुहाना लगे मोर ए देश हा।
कहूँ मालगाड़ी सवारी कहूँ हे, जुड़े हे सबो छोर ए देश हा।।
दिये रेल लाखों करोड़ों ला रोटी, रखे हे बने शोर ए देश हा।
तरक्की मा भारी हवे रेलगाड़ी, तभे मारथे जोर ए देश हा।।
इस तरह रेलगाड़ी हमारे गीत-संगीत और जीवन में गहराई से समाहित है। रेलगाड़ी को लेकर अनेक बाल कविताएँ भी रची गई हैं, जिन्हें बच्चे बड़ी तन्मयता से सुनते हैं और बड़े भी उनमें डूब जाते हैं। रेलगाड़ी से सम्बन्धित कई रेलगाड़ी से संबंधित कुछ गीत हिंदी और छत्तीसगढ़ी में मैंने संकलित करने का प्रयास किया है। यह सूची पूर्ण नहीं है, क्योंकि गीत-संगीत की संख्या बहुत अधिक है। फिर भी, कुछ चुनिंदा गीत आपके मनोरंजन के लिए प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
संकलन
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को, कोरबा(छग)
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