फिल्मी गानों से सीखें छंद ========
फिल्मी गानों से सीखें छंद
फिल्म संसार में अधिकांश गाने किसी न किसी भारतीय सनातनी छंद पर आधारित हैं। इन गानों को बहुत ही आकर्षक धुन में गाया गया है और बहुत ही सम्मोहक पृष्ठभूमि में प्रस्तुत किया गया है। इस लिए ये गाने हमको सरलता से कंठस्थ हो जाते हैं और इनकी लय सहज ही मन में स्थापित हो जाती है। इस लय के अनुकरण से हम संबन्धित छंद की रचना कर सकते हैं और छंद के विधान को भी समझ सकते है। छंद है क्या ? लय का व्याकरण ही तो है छंद। यदि छंद की लय मन में बैठ जाये तो समझिए छंद भी मन में स्थापित हो गया, भले ही हम उसके विधान को शब्दों में व्यक्त न कर सकें। और यदि ऐसा हो गया तो फिर छंद के विधान को समझने में भी देर नहीं लगेगी, जिसके अंतर्गत लय के साथ चरण-संख्या, तुकांत विधान, यति आदि की बात भी सम्मिलित रहती है। आइये किसी एक गाने का उदाहरण लेकर बात करें-
छोडो न मेरा’ आँचल, सब लोग क्या कहेंगे ।
हमको दिवाना’ तुमको, काली घटा कहेंगे।
इस गाने की पंक्तियों को गाते समय गुरु और लघु पर ध्यान दें तो हम पाते हैं की प्रत्येक पंक्ति में लघु-गुरु एक निश्चित क्रम में ही आते हैं और वह क्रम इस प्रकार है-
छोडो न/ मेरा’ आँचल/, सब लोग/ क्या कहेंगे
221/ 2122/ 221/ 2122 अथवा
गागाल गालगागा गागाल गालगागा
यह मापनी अथवा लगावली है उस छंद की, जिस पर यह गाना आधारित है और उस छंद का नाम है दिग्पाल। इसे मृदुगति भी कहते हैं। मूल छंद में ऐसी चार पंक्तियाँ होती हैं जिन्हें चरण कहते हैं और क्रमागत दो-दो चरण अलग-अलग समतुकांत होते हैं। इस छंद पर या किसी अन्य छंद पर जब कोई गाना, गीत, गीतिका, ग़ज़ल या कोई अन्य कविता रची जाती हैं तब तुकांत विधान बदल जाता है और चरण-संख्या का प्रतिबन्ध समाप्त हो जाता है। तब इस छंद को हम उस रचना का ‘आधार छंद’ कहते हैं। प्रस्तुत उदाहरण में दिये गए फिल्मी गाने ‘छोडो न मेरा’ आँचल, सब लोग क्या कहेंगे’ का आधार छंद ‘दिग्पाल’ या ‘मृदुगति’ है।
आइए उपर्युक्त छंद को सम्मिलित करते हुए हम कुछ और भारतीय सनातनी छंदों की चर्चा करते हैं जिनके आधार पर अनेक फिल्मी गानों का निर्माण हुआ है जिनकी सहायता से हम इन छंदों के स्वरूप को सरलता से हृदयस्थ कर सकते हैं और इनके आधार पर शुद्धता और सटीकता के साथ मुक्तक, गीत, गीतिका, ग़ज़ल, भजन, कीर्तन, खंडकाव्य, महाकाव्य आदि की रचना कर सकते हैं।
(1) दिग्पाल (या मृदुगति) छंद
मापनी- 221 2122 221 2122
लगावली- गागाल गालगागा गागाल गालगागा
छंदाधारित फिल्मी गाने-
1) छोडो न/ मेरा’ आँचल/, सब लोग/ क्या कहेंगे
2) सारे ज/हाँ से’ अच्छा/ हिन्दोस/तां हमारा
3) गुज़रा हु/आ ज़माना/ आता न/हीं दुबारा
4) ऐ दिल मु/झे बता दे/, तू किस पे’/ आ गया है?
मूल छंद का उदाहरण-
हमने कहा हृदय से, तुमने मज़ाक जाना,
बिखरा लहू हमारा, वह लाल रंग माना।
वह खेल था तुम्हारा, तुम थे बड़े खिलाड़ी,
हम ही समझ न पाए, कितने रहे अनाडी।
- तिलक जैन
(2) सुमेरु छन्द
मापनी- 1222 1222 122
लगावली- लगागागा लगागागा लगागा
छंदाधारित फिल्मी गाने-
1) मुहब्बत अब/ तिजारत बन/ गयी है
2) मै’ तन्हा था/ मगर इतना/ नही था
3) मुहब्बत कर/ने’ वाले कम/ न होगें
4) अकेले हैं/ चले आओ/ जहां हो
5) हमें तुमसे/ मुहब्बत हो/ गयी है
मूल छंद का उदाहरण-
चलाती देश को यह भीड़ देखो,
उजाड़ा भीड़ का वह नीड़ देखो।
कठिन पहचान है अपनी बचाना,
कहीं तुम भीड़ में ही खो न जाना।
-स्वरचित
(3) विधाता छंद
मापनी- 1222 1222 1222 1222
लगावली- लगागागा लगागागा लगागागा लगागागा
छंदाधारित फिल्मी गाने-
1) सुहानी चां/दनी रातें/ हमे सोने/ नही देतीं
2) मुझे तेरी/ मुहब्बत का/ सहारा मिल/ गया होता
3) चलो इक बा/र फिर से अज/नबी बन जा/यॅँ हम दोनों
4) बहारों फू/ल बरसाओ/ मे’रा महबू/ब आया है
5) सजन रे झू/ठ मत बोलो/ खुदा के पा/स जाना है
मूल छंद का उदाहरण-
ग़ज़ल हो या भजन कीर्तन , सभी में प्राण भर देता ,
अमर लय ताल से गुंजित , समूची सृष्टि कर देता l
भले हो छंद या सृष्टा , बड़ा प्यारा 'विधाता' है ,
सुहानी कल्पना जैसी , धरा सुन्दर सजाता है।
- स्वरचित
(4) शक्ति छंद
मापनी- 122 122 122 12
लगावली- लगागा लगागा लगागा लगा
छंदाधारित फिल्मी गाने-
1) तुम्हारी/ नज़र क्यों/ खफा हो/ गयी,
2) बदन पे/ सितारें/ लपेटे/ हुए ...
3) दिखाई/ दिये यूँ/ कि बेखुद/ किया
मूल छंद का उदाहरण-
चलाचल चलाचल अकेले निडर,
चलेंगे हजारों, चलेगा जिधर l
दया-प्रेम की ज्योति उर में जला,
टलेगी स्वयं पंथ की हर बला l
- स्वरचित
(5) वाचिक भुजंगप्रयात छंद
मापनी- 122 122 122 122
लगावली- लगागा लगागा लगागा लगागा
छंदाधारित फिल्मी गाने-
1) तुम्हीं मे/रे’ मंदिर/ तुम्हीं मे/री’ पूजा/
2) वो’ जब या/द आये/ बहुत या/द आये ।
3) ते’रे प्या/र का आ/सरा चा/हता हूँ
4) बने चा/हे’ दुश्मन/ जमाना/ हमारा
5) अजी रू/ठकर अब/ कहाँ जा/इयेगा
मूल छंद का उदाहरण-
सदा काम आओ कभी मुँह न मोड़ो।
पड़ी हो मुसीबत सदा नेह जोड़ो।
सदा राम का नाम लेते रहोगे ।
बनेंगे सभी काम , विजयी बनोगे ।।
- रीता ठाकुर
(6) आनंदवर्धक (या पीयूषवर्ष) छंद
मापनी- 2122 2122 212
लगावली- गालगागा गालगागा गालगा
छंदाधारित फिल्मी गाने-
1) दिल के अरमां/ आंसुओं में/ बह गए
2) है अगर दुश्/मन ज़माना/ ग़म नहीं
3) पर्वतों से/ आज मैं टक/रा गया
4) कल चमन था/ आज इक सह/रा हुआ
5) दिल ते’री दी/वानगी में/ खो गया
6) आपके पह/लू में’ आकर/ रो दिये
मूल छंद का उदाहरण
लोग कैसे , गन्दगी फैला रहे ,
नालियों में छोड़ जो मैला रहे l
नालियों पर शौच जिनके शिशु करें,
रोग से मारें सभी को, खुद मरें l
- स्वरचित
(7) सार्द्धमनोरम छंद
मापनी- 2122 2122 2122
लगावली- गालगागा गालगागा गालगागा
छंदाधारित फिल्मी गाना-
1) छोड़ दो आँ/चल ज़माना/ क्या कहेगा
मूल छंद का उदाहरण-
मानते भय से, कभी मन से नहीं कुछ।
संहिताओं में नहीं अपना कहीं कुछ।
पर्व ही केवल मनाते रह गये हम।
देश का बस गान गाते रह गए हम।
- ओम नीरव
(8) वाचिक राधा
मापनी- 2122 2122 2122 2
लगावली- गालगागा गालगागा गालगागा गा
छंदाधारित फिल्मी गाना-
1) बस यही अप/राध में हर/ बार करता/ हूँ,
आदमी हूँ/ आदमी से/ प्यार करता/ हूँ।
मूल छंद का उदाहरण-
कौन ऊपर बैठकर रसकुम्भ छलकाये।
छोड़ कर दो-चार छींटे प्यास उमगाये।
कौन विह्वलता धरा की देख मुस्काता,
छेड़ता है राग, गाता और इठलाता।
- ओम नीरव
(9) गीतिका (या वाचिक सीता) छंद
मापनी- 2122 2122 2122 212
लगावली- गालगागा गालगागा गालगागा गालगा
छंदाधारित फिल्मी गाने-
1) आपकी नज़/रों ने’ समझा/ प्यार के का/बिल मुझे
2) चुपके' चुपके/ रात दिन आँ/सू बहाना/ याद है
मूल छंद का उदाहरण-
शब्द के संग्राम में, तलवार है यह गीतिका।
कायरों पर सिंहनी का वार है यह गीतिका।
विश्व में हिन्दी हमारे राष्ट्र की पहचान है ।
गीतिका में हिन्द-हिन्दी का अमिट सम्मान है।
- राहुल द्विवेदी स्मित
(10) वाचिक महालक्ष्मी छंद
मापनी- 212 212 212
लगावली- गालगा गालगा गालगा
छंदाधारित फिल्मी गाने-
1) ज़िंदगी/ की न टू/टे लड़ी
2) ज़िन्दगी/ प्यार का/ गीत है
मूल छंद का उदाहरण-
साधना तुम, तुम्हीं सर्जना,
कवि हृदय की तुम्हीं कल्पना।
गीत हो तुम, तुम्हीं गीतिका।
तुम महाकाव्य हो प्रीति का।
- स्वरचित
(11) वाचिक स्रग्विणी छंद
मापनी- 212 212 212 212
लगावली- गालगा गालगा गालगा गालगा
छंदाधारित फिल्मी गाने-
1) खुश रहे/ तू सदा/ ये दुआ/ है मे’री
2) कर चले/ हम फ़िदा/ जानो’-तन/ साथियों
3) तुम अगर/ साथ दे/ने का’ वा/दा करो
4) बेखुदी/ में सनम/ उठ गए/ जो कदम
5) मैं ते’रे/ इश्क में/, मर न जा/ऊँ कहीं
6) जिन्दगी/ हर कदम/ इक नई/ जंग है
7) जिंदगी/ का सफर/ है ये’ कै/सा सफर
मूल छंद का उदाहरण-
दाढ़ियाँ हैं विविध, हैं विविध चोटियाँ।
धर्म की विश्व में हैं विविध कोटियाँ।
क्या कहें उस मनुज के कथित धर्म को,
जो जिये स्वार्थ में त्याग सत्कर्म को।
- स्वरचित
(12) वाचिक गंगोदक छंद
मापनी- 212 212 212 212 212 212 212 212
लगावली- गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा गालगा
छंदाधारित फिल्मी गाने-
1) तुम अगर/ साथ दे/ने का’ वा/दा करो/, मैं यूँ’ ही/ मस्त नग/मे सुना/ता रहूँ।
2) मैं ते’रे/ इश्क में/, मर न जा/ऊँ कहीं/ तू मुझे/ आजमा/ने की’ को/शिश न कर।
मूल छंद का उदाहरण-
छांदसी काव्य की सर्जना के लिए, भाव को शिल्प आधार दे शारदे !
साथ शब्दार्थ के लक्षणा-व्यंजना से भरा काव्य-संसार दे शारदे !
द्वेष की भीति को प्रीति की रीति से, दे मिटा स्नेह संचार दे शारदे !
विश्व की वेदना पीर मेरी बने, आज ऐसे सुसंस्कार दे शारदे !
- स्वरचित
(13) वाचिक बाला छंद
मापनी- 212 212 2122
लगावली- गालगा गालगा गालगागा
छंदाधारित फिल्मी गाने-
1) रात भर/ का है’ मे’ह/मां अँधेरा
2) आज सो/चा तो’ आँ/सू भराये
3) जा रहा/ है वफ़ा/ का जनाज़ा
मूल छंद का उदाहरण-
रोटियाँ चाहिए कुछ घरों को
रोज़ियाँ चाहिए कुछ करों को
काम हैं और भी ज़िंदगी में
क्या रखा इश्क़-आवारगी में।
- स्वरचित
(14) वाचिक पंचचामर छंद
मापनी- 12 12 12 12 , 12 12 12 12
लगावली- लगा लगा लगा लगा, लगा लगा लगा लगा
छंदाधारित फिल्मी गाने-
ये' ज़िं/दगी/ सवा/ल है/, कि ज़िन्/दगी/ जवा/ब है।
मूल छंद का उदाहरण-
जहाँ समान एकता खुशी वहाँ सदा मिले,
जहाँ नहीं समानता कहाँ समीपता मिले।
बने प्रगाढ़ शृंखला कड़ी-कड़ी जहाँ मिले,
जुड़े जहाँ अनेक हाथ लक्ष्य तो वहाँ मिले।
- राजेश कुमारी
(15) लावणी छंद (मापनीमुक्त)
विधान- 30 मात्रा, 16,14 पर यति, अंत में वाचिक गा
लावणी (30 मात्रा) = चौपाई (16 मात्रा) + 14 मात्रा
छंदाधारित फिल्मी गाने-
1) गोरे गोरे चाँद से’ मुख पर, काली काली आंखें हैं।
2) आओ बच्चों तुम्हे दिखायेँ, झाँकी हिंदुस्तान की ।
3) खूब लड़ी मर्दानी थी वह, झांसी वाली रानी थी।
4) फूल तुम्हें भेजा है खत में, फूल नहीं मेरा दिल है।
5) एक डाल पर तोता बोले, एक डाल पर मैना।
6) रात कली इक ख्वाब में' आई, और गले का हार हुई।
7) कसमें वादें प्यार वफ़ा सब , बातें हैं बातों का क्या ?
8) रामचन्द्र कह गए सिया से , ऐसा कलियुग आएगा
मूल छंद का उदाहरण-
तिनके-तिनके बीन-बीन जब, पर्ण कुटी बन पायेगी,
तो छल से कोई सूर्पणखा, आग लगाने आयेगीl
काम-अनल चन्दन करने का, संयम बल रखना होगा,
सीता-सी वामा चाहो तो, राम तुम्हें बनना होगाl
- स्वरचित
(16) सार छंद (मापनीमुक्त)
विधान- 28 मात्रा, 16,12 पर यति, अंत में वाचिक गागा
सार (28 मात्रा) = चौपाई (16 मात्रा) + 12 मात्रा
छंदाधारित फिल्मी गाने-
1) रोते-रोते हँसना सीखो , हँसते-हँसते रोना।
2) मेरे नैना सावन भादो , फिर भी’ मे’रा मन प्यासा
मूल छंद का उदाहरण-
कितना सुन्दर कितना भोला, था वह बचपन न्यारा l
पल में हँसना पल में रोना, लगता कितना प्यारा l
अब जाने क्या हुआ हँसी के, भीतर रो लेते हैं l
रोते-रोते भीतर-भीतर, बाहर हँस देते हैं l
- स्वरचित
(17) पदपादाकुलक छंद
विधान- 16 मात्रा, प्रारम्भ में गा/द्विकल अनिवार्य, इस गा/द्विकल के बाद एक त्रिकल आये तो उसके बाद पुनः दूसरा त्रिकल अनिवार्य।
छंदाधारित फिल्मी गाना-
जब दर्द नहीं था सीने में,
क्या खाक मजा था जीने में।
मूल छंद का उदाहरण-
कविता में हो यदि भाव नहीं,
पढने में आता चाव नहीं l
हो शिल्प भाव का सम्मेलन,
तब कविता होती मनभावन l
- स्वरचित
(18) मत्तसवैया/राधेश्यामी छंद (मापनीमुक्त)
विधान- 32 मात्रा, 16,16 पर यति, 16-16 मात्रा के प्रत्येक पद के प्रारम्भ में गा/द्विकल अनिवार्य, इस गा/द्विकल के बाद एक त्रिकल आये तो उसके बाद पुनः दूसरा त्रिकल अनिवार्य।
छंदाधारित फिल्मी गाना-
दिल लूटने’ वाले जादूगर, अब मैंने’ तुझे पहचाना है।
मूल छंद का उदाहरण-
जिस गर्भकोश में निराकार, आते-आते साकार हुआ,
इच्छा की भी न प्रतीक्षा की, ऐसा पोषण सत्कार हुआ।
इच्छापेक्षी तरु कल्प लगा, जिसके आगे बस नाम-नाम,
विधि की ऐसी पहली कृति को, मन बार-बार करता प्रणाम।
- स्वरचित
(19) जयकरी/चौपई छंद (मापनीमुक्त)
विधान- 15 मात्रा, अंत में गाल अनिवार्य
छंदाधारित फिल्मी गाना-
तौबा ये मतवाली चाल ,
झुक जाये फूलों की डाल।
मूल छंद का उदाहरण-
भोंपू लगा-लगा धनवान,
फोड़ रहे जनता के कान l
ध्वनि-ताण्डव का अत्याचार,
कैसा है यह धर्म-प्रचार l
- स्वरचित
(20) चौपाई छंद (मापनीमुक्त)
विधान- 16 मात्रा, अंत में गाल वर्जित।
छंदाधारित फिल्मी गाने-
1) दीवानों से ये मत पूछो,
दीवानों पे क्या गुज़री है ।
2) कहीं दूर जब दिन ढल जाये
शाम की' दुल्हन नजर चुराए
मूल छंद का उदाहरण-
बिनु पग चलै सुनै बिनु काना,
कर बिनु करै करम विधि नाना l
आनन रहित सकल रस भोगी,
बिनु बानी बकता बड़ जोगी l
- तुलसीदास
इन उदाहरणों की संख्या बहुत सीमित है जबकि छंदों की संख्या बहुत बड़ी है। सारे छंद तो निश्चित ही फिल्मी गानों से नहीं सीखे जा सकते हैं किन्तु अभी बहुत बड़ी संख्या में छंद शेष है जिन्हें फिल्मी गानों से सीखा जा सकता है। आप चाहें तो इस दिशा में आगे बढ़ सकते है। यदि कुछ ऐसे नये उदाहरण मिलते हैं तो मुझे भी सूचित कर कृतार्थ करें।
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मेरा यह आलेख श्री सर्वेश अस्थाना द्वारा संपादित मासिक पत्र 'साहित्यगंधा' के अंकों सितंबर और अक्तूबर 2017 में क्रमशः प्रकाशित हो चुका है।
- ओम नीरव , चलभाष- 08299034545, 07526063802
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