बुढ़वा बने जवान(सरसी छंद)
नकली चुंदी दाँत लगाके, बुढ़वा बने जवान।
ना जवान के जोश दिखत हे, ना सियान के ज्ञान।।
नवा जमाना सब कुछ बाँटे, बिसा फेक के नोट।
झुर्री झाँई तक दब जावै, दबे दाग जर चोट।।
रंग रंग के दवा दवाई, बदलत हवै जहान।।
नकली चुंदी दाँत लगाके, बुढ़वा बने जवान।।
देखावा के हवै जमाना, सबझन देख झपाँय।
गुण गियान ला कोन पुछत हे, धन वाले अँटियाँय।।
रंग रूप भर चमचम चमकै, मुख ले बरसे बान।
नकली चुंदी दाँत लगाके, बुढ़वा बने जवान।
कनिहा नवे डोकरी नइहे, लउठे धरे सियान।
बेचत पागा लादे लागा, कल ले हो अंजान।।
ना नीयत ना नेकी हावै, ना कोठी ना धान।
नकली चुंदी दाँत लगाके, बुढ़वा बने जवान।।
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को, कोरबा(छग)
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