कुंडलियाँ छंद-पइसा के माया
लंबा कर कानून के, धरे छोट के घेंच।
बात बड़े के होय ता, फँस जाये बड़ पेंच।
फँस जाये बड़ पेंच, करे का कोट कछेरी।
पद पइसा के तीर, लगावैं सबझन फेरी।
मूंदे आँखी कान, कलेचुप बनके खंबा।
देखे बस कानून, जीभ ला करके लंबा।
करजा के दम मा बड़े, बड़े बने हे आज।
लोक लाज के डर नही, नइ हे सगा समाज।
नइ हे सगा समाज, कोन देखाये अँगरी।
रंभा रति नचवाय, मंद पी तीरे टँगड़ी।
इँखरे हे सरकार, भले मर जावैं परजा।
सकल सुरत पद देख, बैंक तक देवै करजा।
फर्जी फाइल ला धरे, होगे बड़े फरार।
रोक छोट के साइकिल, गरजै पहरेदार।
गरजै पहरेदार, दिखाके लउठी डंडा।
नाक तरी धनवान, लुटैं सब ला बन पंडा।
पद पा पूँजी जोर, करैं कारज मनमर्जी।
भागे तज के देश, बनाके फाइल फर्जी।
छोट मँझोलन के रहत, बचे हवै ईमान।
गिरथें उठथें रोज के, बड़े बड़े धनवान।
बड़े बड़े धनवान, चलैं पइसा के दम मा।
धर इज्जत ईमान, जिये छोटे मन कम मा।
जादा के ले चाह, नियत नइ देवैं डोलन।
चादर भीतर पाँव, रखैं नित छोट मँझोलन।
बड़का मन कर नइ रहै, इज्जत सत ईमान।
कोई चाहे कुछु कहै, मूंदें आँखी कान।।
मूंदें आँखी कान, करै का कुटुंब कबीला।
इंखर करनी कांड, कहावै जग मा लीला।।
खांयें सब दिन खीर, काम बूता ला टड़का।।
उँगली कोन उठाय, आदमी वो ए बड़का।।
माया पइसा मा मिले, पइसा मा रस रास।
इज्जत देखे जाय नइ, पइसा हे यदि पास।
पइसा हे यदि पास, पास वो सब पेपर मा।
रखे जेन मा हाथ, पहुँच जाये वो घर मा।
पइसा मा धूल जाय, चरित अउ बिरबिट काया।
कोन पार पा पाय, जबर पइसा के माया।
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को, कोरबा(छग)
बड़े होय नइ कभु बुरा, कुंद्रा के बड़ फेन।
ललित भगौड़ा के घलो, होगे सुष्मी सेन।
खैरझिटिया
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