Thursday, 16 July 2026

संगीत की दुनिया ही अलग है

 संगीत की दुनिया ही अलग है


संगीत में शक्ति है,

संगीत में विरक्ति है।

संगीत में अभिव्यक्ति है,

संगीत में भक्ति है।

संगीत में भाव है,

संगीत में जुड़ाव है।

संगीत में लगाव है,

संगीत नाव है।

संगीत के बिना सब अलग-थलग है,

संगीत की दुनिया ही अलग है।।


संगीत में धरती है,

संगीत में अंबर है।

संगीत में कानन है,

संगीत में घर है।

संगीत में सादगी है,

संगीत में आज़ादगी है।

संगीत हकीम है,

संगीत असीम है।

संगीत में थिरकते सबके पग हैं,

संगीत की दुनिया ही अलग है।।


संगीत हवा है,

संगीत दवा है।

संगीत साज है,

संगीत आवाज़ है।

संगीत परवाज़ है,

संगीत रिवाज़ है।

संगीत तलाश है,

संगीत मोह-पाश है।

संगीत विश्वास है,

संगीत सबसे ख़ास है।

संगीत सुनते जड़-चेतन नभ-खग हैं,

संगीत की दुनिया ही अलग है।।


संगीत में प्रीत है,

संगीत अमृत है।

संगीत में जीत है,

संगीत में रीत है।

संगीत आनंद है, 

संगीत परमानंद है।

संगीत में न भूख है, न प्यास है,

कला साधकों के लिए संगीत एक आस है।

जो संगीत से भागे, वह ठग है,

संगीत की दुनिया ही अलग है।।


संगीत सुकून है,

संगीत धुन है।

संगीत प्रसून है,

संगीत बिन सब सून है।

संगीत भोर है,

संगीत शाम है।

संगीत स्वर है,

संगीत आराम है।

संगीत उड़ान है,

संगीत उत्थान है।

संगीत ईमान है,

संगीत पहचान है।

संगीत में समाया सारा जग है,

संगीत की दुनिया ही अलग है।।


 जीतेन्द्र वर्मा "खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा (छग)


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