Thursday, 16 July 2026

बुलडोजर एक्शन- सरसी छंद

 बुलडोजर एक्शन- सरसी छंद


घर गरीब के बुलडोजर मा, होवत हे जमिदोज।

बनत बंगला हे सरकारी, देय बनइया पोज।।


अपन अटारी बंगला खातिर, तोड़ें पर के ठौर।

गुड़ी गांव जंगल ला चगले, नेता मन बन रौर।।

नवें रहें कुर्सी पाये बर, पद पा कहैं न सोज।

घर गरीब के बुलडोजर मा, होवत हे जमिदोज।।


वोट पाय बर आँख मूंद दैं, परखें नइ सच झूठ।

जीत जाय ता आय जातरी, खड़ें रहैं बन ठूठ।।

हाथ मिला उद्योगी हांसे, खावत छप्पन भोज।

घर गरीब के बुलडोजर मा, होवत हे जमिदोज।।


दीन हीन मन तोर मोर के, झंडा डंडा थाम।

आपस मा ही लड़थें मरथें, गिरा मान अउ दाम।।

तेखर सेती बड़का मन हा, चलें चाल खा बोज।

घर गरीब के बुलडोजर मा, होवत हे जमिदोज।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

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