Thursday, 16 July 2026

साथी कस हवा बरोड़ा-लावणी छंद

 साथी कस हवा बरोड़ा-लावणी छंद


हवा बरोड़ा झाँझ अउ झोला, लागे संगी साथी कस।

बिजली चमके बादर गरजे, घूमन बन बन हाथी कस।।


बादर पानी देखत लइका, घर भीतर आज लुकाये।

फेर हमन ला हवा गरेरा, संगी के असन बुलाये।।

भाग ठिहा ले खेत खार मा, रेंगत राहन पाथी कस।

हवा बरोड़ा झाँझ अउ झोला, लागे संगी साथी कस।।


घाम घरी भर खेत खार मा, डारे राहन सब डेरा।

कांदा कूसा फर फुलवा बर, रोज लगावन फेरा।।

बाग बगीचा खेत मेड़ मा, रहन बइठ शरनाथी कस।

हवा बरोड़ा झाँझ अउ झोला, लागे संगी साथी कस।।


आमा अमली काइत जामुन, बेल लान बिन बिन के।

एक जघा सँकला के बाँटन, फर फुलवा गिन गिन के।।

खेत खार बन बाग मया ला, गठियाय रहन थाथी कस।

हवा बरोड़ा झाँझ अउ झोला, लागे संगी साथी कस।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

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