बड़बोलापन ले बचव-सार छंद
जतिक जरूरत हवै ओतके, बोलव बहिनी भाई।
बड़बोलापन मा हो जाथे, जग मा अपन हँसाई।।
मिलत हवै बोले बर कहिके, आँय बाँय झन बोलव।
बानी ब्रह्म ए छल प्रपंच तज, अमृत बोल मा घोलव।।
बोल बढ़ाये मया दया अउ, बोल बढ़ाय लड़ाई।।
जतिक जरूरत हवै ओतके, बोलव बहिनी भाई।।
झूठ बचन के उमर कहाँ, झूठ कराय फभीता।
लेय सहारा झूठ ढोंग के, रहै जउन हा रीता।।
काम दिखे बोली बयना मा, फोकट हे चिल्लाई।
जतिक जरूरत हवै ओतके, बोलव बहिनी भाई।।
नव जुग मा रिकार्ड होवत हे, कथनी करनी सबके।
आज पाय नइ बोचक कोनो, बेरा नोहे तब के।।
कल परखे जाही बोली ला, तब होही करलाई।
जतिक जरूरत हवै ओतके, बोलव बहिनी भाई।।
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को, कोरबा(छग)
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