कोन चाहथे रोड म आना-कुकुभ छंद
कोन चाहथे रोड म आके, फोकट चिखना चिल्लाना।
हालत हो जाथे जब खस्ता, तब पड़थे कदम उठाना।।
सिस्टम के टँगरी टूटत हे, विधि विधान नइहे एको।
होवत हवै हियाव धनी के, बाकी मनखें ला फेको।
सत्ता अउ शासन के बूता, हाँ में हाँ हवैं मिलाना।
कोन चाहथे रोड म आके, फोकट चिखना चिल्लाना।
नांगर छोड़ किसान खड़े हें, अउ जांगर छोड़ कमैया।
स्कूल छोड़ के खड़े पढ़इया, डूबय मजदूरी नैया।।
फेरी वाले छेरी वाले, खावत हें रहि रहि ताना।
कोन चाहथे रोड म आके, फोकट चिखना चिल्लाना।
गाड़ी रोवय हाँड़ी रोवय, रोवय टपरी घर ठेला।
अस्पताल दफ्तर बन रोवय, गुरू संग रोवँय चेला।।
कलम धरइया आस बढ़ैया, सबके मुख में हें ताला।
कोन चाहथे रोड म आके, फोकट चिखना चिल्लाना।।
जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को, कोरबा(छग)
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