Sunday, 26 July 2026

सिस्टम के गलती-लावणी छंद

 सिस्टम के गलती-लावणी छंद


जियई मरई पढ़ई लिखई, नव जुग बर सब चलती ए।

पढ़े लिखे मन बकत फिरत हें, यहु सिस्टम के गलती ए।।


चलन बढ़त हावै एकल के, नत्ता रिस्ता दुरिहागे।

सबे शार्टकट कोती भागे, सोय रहे चाहे जागे।।

धीरज हे ना लाज शरम हें, यौवन मोम टघलती ए।

पढ़े लिखे मन बकत फिरत हें, यहु सिस्टम के गलती ए।।


नेता अधिकारी बिगड़े हें, बिगड़े हावैं खुद पालक।

अइसन मा घर के लइकामन, बनबें करहीं कुलघालक।।

कई किसम के कांड सुनावैं, लगथे कलयुग ढलती ए।

पढ़े लिखे मन बकत फिरत हें, यहु सिस्टम के गलती ए।।


निजीकरण होवत हे सबके, स्कूल औषधालय दफ्तर।

जिहाँ काम पइसा से मतलब, दया मया चूल्हा मा धर।।

नवा जमाना के गाना मा, लपर झपर एडल्टी ए।

पढ़े लिखे मन बकत फिरत हें, यहु सिस्टम के गलती ए।।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

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